7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: छत्तीसगढ़ में 57 मोबाइल यूनिट से आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों का हो रहा इलाज, बदली ग्रामीणों की जिंदगी

CG News: गांव के पारा -मोहल्ले में कैम्प लगाने क़ी तिथि व स्थान एक माह पूर्व निर्धारित हो जाती हैं। कैम्प लगने क़ी सूचना ग्रामीणों को मुनादी से दी जाती है।

2 min read
Google source verification
CG News: छत्तीसगढ़ में 57 मोबाइल यूनिट से आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों का हो रहा इलाज, बदली ग्रामीणों की जिंदगी

मोबाइल यूनिट से आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों का हो रहा इलाज (Photo Patrika)

CG News: प्रदेश में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) आदिवासी क्षेत्रों में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर सिद्ध हो रही है। अब तक सुदूर एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 5500 से अधिक चिकित्सा शिविरों में 1,16,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया है।

परियोजना से जुडे अधिकारियों ने बताया कि प्रदेशभर में 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट है। इनमें प्रत्येक में एक एमबीबीएस डॉक्टर, नर्स व लैब तकनीशियन की प्रशिक्षित टीम तैनात है। 25 से अधिक प्रकार की लैब जांचों की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसमें प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान एवं रेफरल तथा प्रसवोत्तर देखभाल शामिल हैं।

बच्चों में कुपोषण की स्क्रीनिंग, परामर्श तथा डायरिया, एआरआई/निमोनिया, अस्थमा और खसरे जैसी बीमारियों का इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। योजना में नारायणपुर, ओरछा, बड़े राजपुर (कोंडागांव), कुसमी एवं शंकरगढ़ (बलरामपुर), अंतागढ़ एवं भानुप्रतापपुर (कांकेर), बोडला (कबीरधाम), मैनपुर, देवभोग एवं छुरा (गरियाबंद), नगरी (धमतरी), पाली एवं पौड़ी उपरोड़ा (कोरबा), गौरेला (जीपीएम) और पिथौरा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इस मोबाइल मेडिकल यूनिट में इन यूनिटों में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक जांच उपकरण और मुफ्त दवाएं उपलब्ध होती हैं।एक -एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स, ड्राइवर क़ी टीम होती हैं। इसमें चिकित्सा सलाह सहित इन यूनिटों के माध्यम से मलेरिया, टीबी, कुष्ठ, ओरल कैंसर, सिकल सेल और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो पा रहा है। गांव के पारा -मोहल्ले में कैम्प लगाने क़ी तिथि व स्थान एक माह पूर्व निर्धारित हो जाती हैं। कैम्प लगने क़ी सूचना ग्रामीणों को मुनादी से दी जाती है। सुदूर बस्तियों में रहने वाले लोगों को अब सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए शहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

एक ही जगह जांच और मुफ्त दवा: गांव में ही पूरा इलाज

यह मोबाइल मेडिकल यूनिट एक चलते-फिरते अस्पताल की तरह काम करती है। इसमें मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, नर्स और ड्राइवर की टीम मौजूद रहती है।

बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी जरूरी जांचें मौके पर ही की जाती हैं
डॉक्टरों द्वारा परामर्श दिया जाता है
मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं
इससे ग्रामीणों को एक ही जगह पर पूरी स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है।

पहले से तय शेड्यूल और मुनादी से सूचना: बढ़ रहा भरोसा

प्रशासन द्वारा कैंप की तारीख और स्थान एक महीने पहले तय कर दिए जाते हैं। गांवों में मुनादी (ढोल बजाकर सूचना) के जरिए लोगों को जानकारी दी जाती है। इससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और उनमें उत्साह भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले अस्पताल जाने में पूरा दिन लग जाता था और खर्च भी ज्यादा होता था। अब गांव में ही इलाज मिलने से समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।