
Analog Paneer Supply: खाद्य विभाग की जांच पर उठे सवाल(photo-patrika)
Analog Paneer Supply: छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर और अन्य गैर-दुग्ध उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा के मानकों के बीच भाटापारा में संदिग्ध पनीर की सप्लाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले पनीर की खेप शहर तक किस माध्यम से पहुंच रही है और इसकी निगरानी किस स्तर पर हो रही है, इसे लेकर अब जांच की मांग उठ रही है।
भाटापारा एक प्रमुख व्यापारिक और परिवहन केंद्र है। यहां बसों, ट्रेनों और अन्य माध्यमों से रोजाना बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री पहुंचती है। ऐसे में दूसरे राज्यों से आने वाले पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की जांच व्यवस्था को लेकर सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
शहर में खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए बस और रेलवे पार्सल व्यवस्था का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि संदिग्ध या मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले पनीर की खेप भी इसी माध्यम से भाटापारा तक पहुंच सकती है। यदि ऐसी सप्लाई हो रही है तो उसके स्रोत, परिवहन और वितरण नेटवर्क की जांच जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों द्वारा पार्सल में आने वाली खाद्य सामग्री के दस्तावेजों और उत्पाद की गुणवत्ता की जांच की जा सकती है।
भाटापारा के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में पनीर से बने व्यंजनों की मांग रहती है। ऐसे में खाद्य विभाग के लिए यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि इन प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाला पनीर कहां से खरीदा जा रहा है।
जरूरत पड़ने पर खाद्य प्रतिष्ठानों से पनीर के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच भी कराई जा सकती है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
एनालॉग पनीर पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग श्रेणी का उत्पाद हो सकता है और इसके निर्माण, लेबलिंग, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर खाद्य सुरक्षा संबंधी नियम लागू होते हैं। किसी उत्पाद की बिक्री या आपूर्ति नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह उसकी संरचना, लेबलिंग और संबंधित खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही स्पष्ट किया जा सकता है। इसलिए संदिग्ध पनीर मिलने की स्थिति में केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय नमूना लेकर वैज्ञानिक जांच कराना महत्वपूर्ण होगा।
भाटापारा में खाद्य सामग्री की आवाजाही को देखते हुए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले पार्सलों की निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खाद्य सामग्री के नाम पर आने वाले पार्सलों की पहचान, बिल और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए तो सप्लाई के स्रोत का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा थोक बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों तक पहुंचने वाली खेप की भी जांच की जा सकती है।
मामले में अब लोगों की नजर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि विभाग को संदिग्ध पनीर की सप्लाई की शिकायत या सूचना मिलती है तो संबंधित स्थानों पर निरीक्षण, सैंपलिंग और दस्तावेजों की जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सकती है।
बस स्टैंड से रेलवे पार्सल, थोक बाजार और होटल-रेस्टोरेंट तक जांच का दायरा बढ़ता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि संदिग्ध पनीर की सप्लाई हो रही है, तो उसका स्रोत क्या है और शहर में उसकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
Updated on:
23 Aug 2026 12:11 pm
Published on:
23 Aug 2026 12:10 pm
