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एनीमिया : जांच के तरीकों में बदलाव करने की तैयारी

एक्सपट्र्स क्या कहते हैं

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एनीमिया : जांच के तरीकों में बदलाव करने की तैयारी

एनीमिया : जांच के तरीकों में बदलाव करने की तैयारी

एनीमिया खून से संबंधित एक बीमारी है, जिसे शरीर में खून की कमी होना भी कहा जाता है। इस बीमारी के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। ताजा रिपोर्ट बताती हैं कि 58 फीसदी बच्चे और 53 फीसदी युवा महिलाएं तथा 50 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी का शिकार होती हैं। इसे दूर करने के लिए हालांकि सरकार द्वारा कई तरह के काम किए जा रहे है लेकिन इसमें कुछ नीतिगत बदलावों की रुपरेखा भी तैयार होने लगी है। भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ परामर्श कर एनिमिया जांच के मानकों में बदलाव करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले जानिए की आखिर क्या होता है एनीमिया और इसके लक्षण-

क्या होता है एनीमिया
शरीर में आयरन की कमी होने लगती है। जब शरीर में ब्लड सेल्स धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। ऐसा तब होता है जब बॉडी को जरूरत के मुताबित डायट नहीं मिलती है। ज्यादातर ये परेशानी किशोरावस्था में होती है।

इसके लक्षणों की बात करें तो इसमें पीली स्किन, थकान, सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, ठंडे हाथ और पैर, सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, दिल की धड़कन तेज होना।

क्या कहते हैं एक्सपट्र्स
एक्सपर्ट की मानें तो नए दिशा-निर्देशों को बेहद सरल तरीके से आम लोगों के सामने रखा जाएगा ताकि सामान्य पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी उन्हें समझ सके और उसके अनुरूप अपना खान-पान सुनिश्चित कर सके। इसी के साथ नये दिशा-निर्देशों को तीन पैरामीटर पर केंद्रित रखा गया है। खाने की मात्रा, गुणवत्ता और खाने की चीजें। पांच खाने की चीजों में सब्जी, फल, नट, फैट और मिल्क प्रोडक्ट शामिल हैं।

एनआईएन के विशेषज्ञों ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में खान-पान के मौजूदा पैटर्न को बदलने की कोशिश की गई है। उदाहरण के लिए अभी किसी व्यक्ति को रोजाना 2100 कैलोरी की जरूरत है तो उसे अनाज से 50 फीसदी यह हासिल करनी चाहिए लेकिन वह 70 फीसदी कैलोरी अनाज से ले रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह चलन देखा गया है। प्रोटीन से कैलोरी 12-15 फीसदी के बीच होनी चाहिए। यह काफी हद तक ठीक है। जबकि फैट से 20-30 फीसदी कैलोरी हासिल करनी चाहिए लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह कम है जबकि शहरी क्षेत्रों में 40 फीसदी से भी ज्यादा है। खान-पान की इन्हीं गड़बडियों के कारण डायबिटीज और अन्य मेटाबालिज्म विकार उत्पन्न हो रहे हैं। पोषण के लिए सही डायट जरूरी है।

एनआईएन इस साल के आखिर में एक व्यापक खाद्य सर्वे करेगा जिसमें यह जानने की कोशिश की जाएगी कि भारतीय अभी क्या खा रहे हैं। ऐसा सर्वे उसने 2017 में भी किया था।