10 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

3 करोड़ की कोटवारी जमीन कैसे बिक गई? पूर्व MLA की शिकायत पर बेमेतरा कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, जानें पूरा मामला

Kotwari Land Sale: बेमेतरा में करीब 2 एकड़ कोटवारी जमीन की कथित बिक्री का मामला सामने आया है। बेरला रोड पर स्थित इस जमीन की बाजार कीमत 3 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
2 min read
Google source verification
Chhattisgarh News

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bemetara Kotwari Land Case: नगर पालिका बेमेतरा क्षेत्र में कोटवारी भूमि की बिक्री का एक गंभीर मामला सामने आया है। बेरला मार्ग पर स्थित लगभग 2 एकड़ कोटवारी जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है, उसे नियमों को ताक पर रखकर बेच दिया गया है। इस कथित अवैध खरीद-बिक्री को लेकर पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने आपत्ति जताई है।

अधिकारियों व भू-माफिया की मिलीभगत की आशंका

उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार भू-माफिया की मिलीभगत की आशंका जाहिर करते हुए बेमेतरा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई से लिखित शिकायत की है। जिसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और राजस्व सचिव नवा रायपुर को भी भेजी गई हैं, ताकि उच्च स्तर पर मामला मंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में रहे।

कोटवारी जमीन की रजिस्ट्री संभव नहीं

पूर्व विधायक ने शिकायत में स्पष्ट किया है कि शासन के कड़े नियमों के अनुसार कोटवारी जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह भूमि शासन की ओर से कोटवार को केवल उसकी सेवा के एवज में जीवन-यापन (उपयोग) के लिए दी जाती है, न कि निजी संपत्ति के रूप में बेचने के लिए। बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की शह के बिना इतनी कीमती जमीन का हस्तांतरण और रजिस्ट्री होना संभव नहीं है। इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायत पर मामला हुआ उजागर

पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि आम जनता से यह गंभीर शिकायत प्राप्त हुई है कि कोबिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा भूमि को नियम-विरुद्ध तरीके से बेचा गया है। इन गांवों में कोटवारी व्यवस्था समाप्त होने के बाद भी भूमि का गलत हस्तांतरण किया गया, जिससे स्थानीय निवासियों में काफी रोष व्याप्त है।

हल्का पटवारी की भूमिका पर सवाल

कोटवारी जमीन की गैर-कानूनी खरीद-बिक्री या हस्तांतरण में पटवारी की भूमिका सबसे प्रमुख और शुरुआती कड़ी होती है, क्योंकि जमीन के किसी भी नामांतरण, सीमांकन या रजिस्ट्री से पहले का पूरा रिकॉर्ड पटवारी के पास ही होता है। सरकारी रिकॉर्ड (खसरा/बी-1) में स्पष्ट लिखा होता है कि भूमि शासन की है या कोटवारी सेवा भूमि’ है। बताया जाता है कि एसी जमीन की ब्रिकी पर पटवारी नामांतरण या रिकॉर्ड दुरुस्ती के दौरान खसरे के रिमार्क कॉलम से कोटवारी भूमि शब्द को गायब कर देता है या उसे सामान्य भूमिस्वामी (निजी जमीन) के रूप में दर्ज कर देता है।

कोटवारी भूमि खरीद-बिक्री पर कानूनी रोक

  • सेवा भूमि, मालिकाना हक नहीं: कोटवारी जमीन केवल शासकीय सेवा के बदले जीवन-यापन हेतु दी जाती है, इस पर कोटवार का निजी मालिकाना हक नहीं होता।
  • विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध: यह भूमि अहस्तांतरणीय है। इसे बेचना, दान देना या बंधक रखना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
  • वैध रजिस्ट्री पर जब्ती: ऐसी भूमि की खरीद-बिक्री की रजिस्ट्री शून्य (अवैध) मानी जाएगी और शासन इसे तत्काल वापस जब्त कर लेगा।

इस अवैध बिक्री पर कार्रवाई का प्रावधान

  • अवैध रजिस्ट्री का स्वत: रद्द होना
  • शासकीय खाते में बेदखली और भूमि की वापसी
  • कोटवार पर कार्रवाई, पद से बर्खास्तगी, जमीन छीनना
  • संलिप्त अधिकारी, पटवारी एवं पंजीयक पर कार्रवाई
  • खरीदार और भू-माफिया पर कार्रवाई

प्रतिष्ठा ममगाई, कलेक्टर बेमेतरा के मुताबिक, कोटवोरी भूमि की बिक्री के संबंध में शिकायत मिली है। बेमेतरा एसडीएम को जांच के आदेश दिए गए हैं।

बड़ी खबरें

View All

रायपुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग