
राजधानी में खून की कालाबाजारी
Chhattisgarh news: रायपुर रेडक्रॉस में हुए खून घोटाले की पड़ताल करने जांच कमेटी बुधवार को ब्लड बैंक पहुंची। पूछताछ के दौरान खून के सौदागरों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी अकाउंटेंट और सुपरवाइजर के बयान की वीडियोग्राफी भी करवाई गई है। माना जा रहा है कि अब इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
जांच कमेटी ने की वीडियोग्राफी
कोरोनाकाल में हुई 800 यूनिट खून की कालाबाजारी का पत्रिका ने 20 अप्रैल को पर्दाफाश किया था। राजभवन से रायपुर कलेक्टर को जांच के आदेश दिए गए। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने प्रशिक्षु आईएएस जयंत नाहटा और सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी को जांच अधिकारी नियुक्त किया। दल पिछले 3 दिनों से रेडक्रॉस ब्लड बैंक पहुंचकर मामले की (Raipur Red Cross news) जांच कर रहा है। बुधवार को अकाउंटेंट राजेश मिश्रा और सुपरवाइजर आसिफ इकबाल खान से पूछताछ हुई। दोनों ने घुमाने की कोशिश की, लेकिन पूर्व मेडिकल ऑफिसर को लिखे गए माफीनामा का हवाला दिया तो दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
‘तुम्हें तो दारू भट्ठी में होना चाहिए’
जांच अधिकारियों ने अकाउंटेंट और सुपरवाइजर से खून बेचने की बात पूछी तो वे बगले झांकने लगे। इधर-उधर की बात बताने लगे। इसके बाद अधिकारियों ने उनके द्वारा पूर्व में लिखे गए माफी पत्र के बारे में पूछा। इस पर वे दोनों कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। थोड़ी सख्ती पर टूट पड़े और कबूल किया कि हां सर, हमसे गलती हो गई। इस पर आईएएस नाहटा ने तमतमाते हुए कहा कि ’तुम्हें तो दारू भट्ठी जैसी किसी जगह में काम करना चाहिए’। इतनी जिम्मेदारी वाली जगह में तुम जैसों का क्या काम। फर्स्ट हाफ में हुई इस पूछताछ के बाद सेकंड हाफ में वीडियोग्राफी के लिए दोनों को सीएमएचओ दफ्तर बुलाया गया।
पूर्व मेडिकल ऑफिसर से भी 7 बिंदुओं पर पूछताछ
जांच कमेटी ने बुधवार को ब्लड बैंक के पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. डीवी बघेल को भी पूछताछ के लिए बुलाया था। कमेटी ने उनसे 7 बिंदुओं पर जवाब मांगा था। सारे बिंदुओं के जवाब देने के बाद उन्होंने खुद को नाटकीय ढंग से ब्लड बैंक से हटाने पर ही सवाल खड़े कर दिए। बता दें कि डॉ. डीवी बघेल ने न तो रिजाइन किया है और न ही उन्हें नौकरी से (Blood Scam) हटाने का आदेश जारी किया गया है। खून घोटाले में शामिल अकाउंटेंट ने मार्च महीने में ये कहते हुए उन्हें ब्लड बैंक आने से मना कर दिया था कि अबसे आपके हस्ताक्षर मान्य नहीं हैं।
खून बेचने पर क्या कहते हैं कानून के जानकार? जानिए...
भारत में पैसों के बदले खून का लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित है। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन एक्ट 2007, आईपीसी और ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में इसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। कानून के मुताबिक अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसे 7 साल की सजा हो सकती है। 20 हजार रुपए जुर्माना भी वसूला जा सकता है।
-राजेंद्र जैन, एडवोकेट
घोटाले की जांच जारी
खून घोटाले की जांच जारी है। मामले में संलिप्त लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। एक-दो दिन रुकिए। जांच खत्म होने के बाद आपको पूरी जानकारी देता हूं।
-डॉ. मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ
Updated on:
25 May 2023 01:41 pm
Published on:
25 May 2023 01:07 pm
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