
मृतक आदिल खान ( Photo - Patrika )
Patrika Live: ताबीर हुसैन की रिपोर्ट. नवा रायपुर की सेंध लेक में गुरुवार को बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों की मॉकड्रिल चल रही थी। एसडीआरएफ के जवान पानी में ‘डूबे’ लोगों को बचाने का अभ्यास कर रहे थे। रेस्क्यू बोट पानी में उतरी थी, जवान डमी लोगों को बाहर निकाल रहे थे, सीपीआर दिया जा रहा था और तीन बकरियों को भी बचाने की कवायद चल रही थी। इसी बीच काल्पनिक कहानी के बीच एक वास्तविक घटना सामने आ गई।
नकटी गांव के पास ब्लू वाटर में डूबे युवक का शव 50 घंटे बाद भी नहीं मिला है। जब उसके परिजनों को पता चला कि बड़ी संख्या में एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन का अमला सेंध लेक में मौजूद है, तो वे भी वहां पहुंच गए। उनका सवाल सीधा था जब यहां पूरी फौज मौजूद है तो हमारे डूबे परिजन की तलाश के लिए टीम क्यों नहीं?
परिजनों ने पहले अधिकारियों से शांतिपूर्वक अपनी बात रखी। उनका कहना था कि एक तरफ यहां डूबने का अभ्यास किया जा रहा है, दूसरी तरफ उनका अपना आदमी हकीकत में पानी में डूब गया है और उसकी तलाश का इंतजार हो रहा है। काफी देर तक बात नहीं बनी तो उनकी नाराजगी बढ़ गई। मौके की स्थिति को देखते हुए बाद में एक टीम को ब्लू वाटर भेजे जाने की व्यवस्था की गई। इस घटनाक्रम ने मॉक ड्रिल की उपयोगिता और मौके पर मौजूद संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
मॉक एक्सरसाइज परसदा सेंध झील में सुबह 10.30 बजे से प्रस्तावित थी। एसडीआरएफ के जवान भी सुबह से ही तैयारी में जुटे थे। लेकिन औपचारिक शुरुआत निर्धारित समय पर नहीं हुई। ड्रिल दोपहर 1.15 बजे शुरू की गई। यानी तय समय से करीब पौने तीन घंटे बाद। इसके बाद जो पूरी कवायद हुई, वह महज 29 मिनट में खत्म हो गई। यानी तैयारी के नाम पर घंटों इंतजार और वास्तविक अभ्यास के नाम पर आधे घंटे से भी कम समय।
बकरियों के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार का प्रदर्शन किया जाना था। इसके लिए पशु चिकित्सक भी मौजूद थे। बताया गया कि संबंधित अमला सुबह से ही वहां पहुंच गया था। यानी जांच के लिए जिस प्रक्रिया में कुछ ही मिनट लगने वाले थे, उसके लिए संबंधित कर्मचारी काफी पहले से मौके पर मौजूद थे।
मॉकड्रिल के दौरान करीब 30 महिला-पुरुष वर्दीधारी भी मौके पर तैनात दिखाई दिए। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि बड़ी संख्या में तैनात जवानों में से कई की भूमिका मुख्य रूप से रस्सी संभालने और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रही।
माना इलाके में अपने दोस्त के साथ ब्लू वॉटर टैंक को पार करते समय डूबने वाले युवक का दूसरे दिन भी पता नहीं चला। गुरुवार को एसडीआरएफ और पुलिस की टीम दिनभर उसकी तलाश में लगी रही। शाम होने के बाद सर्चिंग रोक दी गई। उल्लेखनीय है कि मौदहापारा निवासी आदिल खान अपने दोस्तों के साथ बुधवार की शाम ग्राम नकटी स्थित ब्लू वॉटर टैंक गया था। शाम करीब 4 बजे आदिल और उसके साथी ने ब्लू वॉटर टैंक को तैरकर पार करने की शर्त लगाई। इसके बाद दोनों तैरने लगे। आधे रास्ते में आदिल पानी में डूब गया। उसका दूसरे दिन भी पता नहीं चल पाया है। उल्लेखनीय है कि ब्लू वॉटर टैंक एक पत्थर खदान है। काफी गहरी होने के कारण उसमें कई लोग डूब चुके हैं।
ब्लू वाटर पार्क में डूबे युवक का दूसरे दिन भी शव नहीं मिलने पर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि कलेक्टर गौरव ङ्क्षसह से मुलाकात कर शव को जल्द से जल्द निकलवाने की मांग की।
डमी व्यक्ति को पानी से बाहर निकालने के बाद उसे सीपीआर दिया गया। इसके बाद जब वह प्रतीकात्मक तौर पर होश में आया, तब स्ट्रेचर मंगाने के लिए आवाज लगाई गई। वास्तविक आपदा की स्थिति में पानी से निकाले गए व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है। ऐसे में स्ट्रेचर और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था पहले से घटनास्थल पर मौजूद रहना अपेक्षित है। मॉकड्रिल में स्ट्रेचर बाद में बुलाए जाने की प्रक्रिया ने व्यवस्था की तत्परता पर सवाल खड़ा कर दिया।
मॉकड्रिल में झील में 5 से 6 लोगों के डूबने की स्थिति बनाई गई। एसडीआरएफ के जवानों ने रेस्क्यू बोट के जरिए पानी में उतरकर डूबने वालों को बाहर निकालने का अभ्यास किया। डूबने वालों की भूमिका भी एसडीआरएफ के जवानों ने ही निभाई। पानी में उतरने, डूबने का अभिनय करने और फिर रेस्क्यू किए जाने की प्रक्रिया दिखाई गई। रेस्क्यू बोट से डमी व्यक्ति को किनारे लाने के बाद उसे सीपीआर देने का अभ्यास भी किया गया। यहां भी एक सवाल खड़ा हुआ।
प्रदेश में मानसून का आधे से ज्यादा समय गुजर चुका है। इस दौरान अलग-अलग इलाकों में बाढ़, जलभराव और डूबने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों की मॉकड्रिल अब जाकर हुई। इस लिहाज से ड्रिल का उद्देश्य केवल रेस्क्यू का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि यह देखना था कि अलग-अलग विभाग वास्तविक आपदा के समय कितनी तेजी और समन्वय के साथ काम करते हैं।
Updated on:
21 Aug 2026 01:57 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:57 pm
