
पुरी धाम जैसे सज रहे जगन्नाथ के रथ (Photo source- Patrika)
CG News: राजधानी के जगन्नाथ स्वामी मंदिरों में पुरीधाम जैसी तैयारियां चल रही हैं। वहीं, रथयात्रा का उल्लास भी बढ़ता जा रहा है। शहर के कई स्थानों पर तैयारियां चल रही हैं। जगन्नाथ महाप्रभु, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ को आकर्षक रंगरोगन किया जा रहा है। गायत्री नगर के जगन्नाथ मंदिर में नए रथ पर सवार होकर महाप्रभु अपने भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।
अभी बीमार चल रहे हैं, इसलिए मंदिर के पुजारी भगवान महाप्रभु को सुबह-शाम विभिन्न प्रकार की औषधियों के काढ़े का भोग लगा रहे हैं। ऐसी रस्में सदरबाजार, टूरी हटरी प्राचीन मंदिर और गायत्री नगर मंदिर में की जा रही हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जेष्ठमास की पूर्णिमा तिथि पर महाप्रभु अत्याधिक स्नान करने से बीमार पड़ जाते हैं।
इसी दिन से मंदिरों के पट पूजा-पाठ के लिए 15 दिनों के लिए बंद हो जाते हैं। इस दौरान केवल औषधियों के काढ़ा का ही भोग लगाया जाता है। ताकि भगवान ठीक हो सके। जब भगवान स्वस्थ्य हो जाते हैं, तब सबसे पहले नेत्रोत्सव मनाया जाता है। स्नान कराकर शृंगार पूजन, आरती की जाती है। फिर रथयात्रा के माध्यम से नगर के भक्तों को अपने भाई-बहन के साथ महाप्रभु दर्शन देने के लिए निकलते हैं। इसलिए रथयात्रा के दौरान भक्तों का सैलाब साथ चलता है।
छत्तीसगढ़ से बड़ी संया में लोग रथयात्रा में शामिल होने के लिए पुरीधाम जाते हैं। इसे वजह से पुरी जाने वाली ट्रेनें पूरी तरह से एक सप्ताह तक पैक चलती हैं। इसके लिए एक स्पेशल ट्रेन भी रेलवे 27 जून से गोंदिया स्टेशन से चलाने जा रहा है, जिसमें 18 कोच हैं।
CG News: रथयात्रा के दिन जैसे ही मंदिर से भगवान जगन्नाथ को रथ तक लाया जाता है, उस समय रास्ते में राज्यपाल और मुयमंत्री सोने की झाडू से रास्ता साफ करने की रस्में पूरी करते हैं। क्योंकि महाप्रभु जगत के राजाधिराज हैं।
गायत्री नगर मंदिर के अध्यक्ष विधायक पुरंदर मिश्रा बताते हैं कि चूंकि बीमार होने की वजह से भगवान कमजोर पड़ जाते हैं। इसलिए अंकुरित चना और मूंग का भोग लगाया जाता है, ताकि महाप्रभु स्वस्थ हो जाएं। उस प्रसाद को भक्तों में वितरित किया जाता है।
Published on:
25 Jun 2025 12:46 pm
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