10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Chanderi Land Issue: नकटी के बाद अब चंदेरी की चरागाह जमीन उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी, पूर्व मंत्री अकबर ने सरकार पर उठाए सवाल

Chanderi Land Issue: चंदेरी की करीब 59 एकड़ चरागाह जमीन उद्योग के लिए दिए जाने पर पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के आश्वासन और ग्राम सभा के विरोध का हवाला दिया।
3 min read
Google source verification
Chhattisgarh land dispute

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर (Photo Patrika)

Chhattisgarh land dispute: बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील के ग्राम चंदेरी में चरागाह की जमीन को औद्योगिक क्षेत्र के लिए दिए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नकटी कांड के बाद अब चंदेरी की चरागाह भूमि को उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शासन के निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है।

दामाखेड़ा में मुख्यमंत्री के आश्वासन का दिया हवाला

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री के पूर्व में दिए गए आश्वासन का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी 2024 को दामाखेड़ा में कबीरपंथ के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग नहीं लगाने को लेकर आश्वासन दिया था। अकबर का आरोप है कि मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बावजूद चंदेरी में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए चरागाह की जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि यदि दामाखेड़ा के आसपास उद्योग नहीं लगाने का आश्वासन दिया गया था तो चंदेरी की भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए किस आधार पर दिया गया।

नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना

अकबर के मुताबिक चंदेरी में करीब 23.93 हेक्टेयर यानी लगभग 59 एकड़ चरागाह भूमि को नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को आधिपत्य में दिया गया है। उनका कहना है कि यह जमीन केवल एक गांव के मवेशियों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास की करीब 8 से 10 ग्राम पंचायतों के गोवंश और अन्य मवेशियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्राकृतिक चरागाह है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शासन के निर्देशों का भी हवाला

मोहम्मद अकबर ने अपने आरोपों के समर्थन में छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2011 के निर्देश का हवाला दिया। उनके अनुसार इस निर्देश में सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि को भविष्य में किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं किए जाने की बात कही गई है। अकबर का दावा है कि इसके बावजूद चंदेरी तहसील के खसरा नंबर 1660, 2206, 2207 और 1743 की कुल करीब 23.93 हेक्टेयर भूमि को उद्योग विभाग के आधिपत्य में दे दिया गया।

ग्राम पंचायत की आपत्ति का भी किया गया उल्लेख

अकबर ने दावा किया कि नायब तहसीलदार सिमगा की 19 जनवरी 2025 की आदेश-पत्रिका में ग्राम पंचायत चंदेरी की आपत्ति का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद बाद में जमीन का आधिपत्य तहसीलदार सिमगा के माध्यम से उद्योग केंद्र बलौदाबाजार को सौंप दिया गया। पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि जब ग्राम पंचायत की ओर से भूमि के उपयोग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, तो उसके बाद भी भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए देने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।

ग्राम पंचायत और ग्राम सभा ने भी जताया विरोध

मोहम्मद अकबर ने दावा किया कि चंदेरी ग्राम पंचायत ने इस जमीन को उद्योग के लिए हस्तांतरित नहीं करने को लेकर बाकायदा प्रस्ताव पारित किया था। उनके अनुसार 20 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत चंदेरी की बैठक में सर्वसम्मति से उक्त भूमि को उद्योग के लिए हस्तांतरित नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को ग्राम सभा की बैठक में भी चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए देने का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। अकबर का आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभा के विरोध के बावजूद भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। अकबर का आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभा के विरोध के बावजूद भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।

भुइयां पोर्टल पर उद्योग के नाम दर्ज होने का दावा

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के विरोध के बावजूद भुइयां पोर्टल पर संबंधित खसरों की जमीन संचालक उद्योग के नाम पर दर्ज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जिस भूमि को ग्रामीण लंबे समय से चरागाह के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं, वह गांव के निस्तार पत्रक में भी चरागाह के तौर पर दर्ज है। ऐसे में इस भूमि का औद्योगिक उपयोग किए जाने से आसपास के ग्रामीणों और पशुपालकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को दामाखेड़ा में दिए गए अपने आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में चंदेरी की जमीन के मामले की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चरागाह और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए दिए जाने की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई।

राजस्व मंत्री से भी मांगा जवाब

अकबर ने इस मामले को लेकर राजस्व मंत्री पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला राजस्व मंत्री के गृह जिले से संबंधित है, ऐसे में उन्हें पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पूर्व मंत्री ने सवाल किया कि जब ग्राम पंचायत और ग्राम सभा दोनों ने चरागाह की जमीन को उद्योग के लिए देने का विरोध किया है, तो सरकार की ओर से इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने राजस्व मंत्री से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि चरागाह की जमीन को बचाने के लिए सरकार की क्या नीति और स्थिति है।

बड़ी खबरें

View All

रायपुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग