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हौसलों से भरी है 4th क्लास की जेबा की ये कहानी, स्कूल से आने के बाद बेचती है समोसा

11 साल की जेबा के सिर पर मां का आंचल तो है लेकिन पिता का साथ नहीं।
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CG news

चंदू निर्मलकर/रायपुर. ये कहानी है राजधानी की एेसी बच्ची की जो स्कूल से आने के बाद दोपहर से शाम तक गली में घूम-घूम कर समोसा बेचती है। संतोषी नगर की रहने वाली 11 साल की जेबा के सिर पर मां का आंचल तो है लेकिन पिता का साथ नहीं। 4 भाई-बहनों में बड़ी जेबा घर की आर्थिक परिस्थितियों से लड़कर अपने दिल में शिक्षा के जरिए कुछ कर गुजरने का सपना लिए वह हर दिन यह काम करती है। अपने छोटे भाई-बहनों की भी जिम्मेदारी वह बखूबी से निभाती है। बच्ची की इसी जज्बें को जिंदा रखने और उनमें जुनून भरने शहर के जैनित इन्क्लूशन इन्सपाईरेशन फाउण्डेशन सहयोग दे रहा है। फाउण्डेशन में एेसे ही कई बच्चों की मदद कर उन्हें नि:शुल्क शिक्षा देने का नेक काम किया जा रहा है। जेबा भी इस नि:शुल्क स्कूल में पढ़ती है। इस स्कूल में बच्चों को शिक्षा के अलावा उनकी प्रतिभा सामने लाने व उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने कई कार्यक्रम भी आयोजित करते रहते हैं।

जरूरतमंदों को ट्यूशन के अलावा स्कूली शिक्षा भी दे रहा फाउंडेशन
जैनित इन्क्लूशन इन्सपाईरेशन फाउण्डेशन के सचिव मुहम्मद जावेद पोची ने बताया कि हमारा फाउण्डेशन अमानत जैनित स्कूल का संचालन पिछले 2 वर्षों से किया जा रहा है। जिसमें स्लम एरिया के बच्चे जो आर्थिक परिस्थितियों के चलते शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं उन्हें नि:शुल्क दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल में अभी 50 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में ज्यादातर एेसे बच्चे है जो अपनी गरीबी के चलते शिक्षा पाने में अपने आप को कमजोर महसूस कर रहे थे। अभी 8वीं क्लास तक की शिक्षा दी जा रही है। जिसमें बच्चे उर्दू, संस्कृत अंग्रेजी की भाषाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारा स्कूल छत्तीसगढ़ माध्यिम शिक्षा मंडल और मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। नि:शुल्क स्कूल के अलावा ट्यूशन क्लासेज भी लगातार 15 सालों से संचालित कर रहे हैं। फाउण्डेशन का मकसद है कि गरीब और डिसेबल बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा देकर उन्हें आगे बढ़ाया है।

पढ़ाई और खेलकूद में भी अव्वल
जेबा ४वीं क्लास की छात्रा है। टीचर मुहम्मद जावेद पोची ने बताया कि जेबा खेलने कूदने की उम्र में परिवार की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर लेकर बखूबी पढ़ाई कर रही है। उनका ये आत्मविश्वास बाकी बच्चों के लिए आज प्रेरणा बन रहा है। इसके अलावा 8वीं क्लास तक पढ़ाने वालों में कुछ बच्चे डिसेबल है तो कुछ के इस दुनिया में कोई नहीं है। एेसे बच्चों को अपनापन देकर उनमें शिक्षा की अलख जगाया जा रहा है।

जीफ टैलेंट में 76 बच्चों को दिया अवार्ड
हाल ही में 11 फरवरी को जीफ टैलेंट अवार्ड सेरेमनी का अयोजन किया गया। अध्यक्ष अमीना मेनन ने बताया कि इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ाने व उनके अंदर छिपी प्रतिभा को सामने लाना है। अवार्ड सेमेमनी में खेल-कूद, शाला साफ-सफाई अभियान, ड्राइंग-पेंटिंग, निबंध, प्रश्नोत्तरी जैसे 12 अलग-अलग प्रतियोगिताएं हुई।

इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले 76 बच्चों को पुरस्कार दिया गया। जेबा ने भी एक अवार्ड अपने नाम किया। अमीना मेनन ने बताया कि समारोह में सबसे साख एक मासूम बच्ची रही जो शरीरिक कमजोरी के बावजूद हू-बहू महात्मा गांधी जी की पेंटिंग उकेरी। उसे बेस्ट पेंटिंग का अवार्ड दिया गया।

12 स्लम एरिया में किया सर्वे
टीचर और वकील की भूमिका निभा रहे जैनित इन्क्लूशन इन्सपाईरेशन फाउण्डेशन के सचिव मुहम्मद जावेद पोची ने बताया कि डिसेलेक्सिया, डिसग्राफिया, एक्सट्रा नॉलेजेबल के अलावा गरीब बच्चों को ढूंढ निकालने के लिए शहर के 12 स्लम एरिया में सर्वे किया। जिसमें से 72 बच्चों को गोद लेकर शिक्षा दी जा रही है।

अगले साल से ये सुविधा भी
फाउण्डेशन के सचिव मुहम्मद जावेद ने बताया कि अलगे साल से स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ योगा, डांसिंग, पेंटिंग, स्कूल ड्रेस खाना की भी सुविधा दी जाएगी।