
कोर्ट, पत्रिका फोटो
CG News: ईओडब्ल्यू चीफ अमरेश मिश्रा, एएसपी चंद्रेश ठाकुर और डीएसपी राहुल शर्मा के खिलाफ पेश किए गए परिवाद को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा बेक ने कहा कि विचारण का अधिकार न्यायालय को नहीं है इसलिए परिवाद निरस्त किया जाता है। यह फैसला परिवाद के गुण-दोष पर नहीं बल्कि अदालत के विचारण का क्षेत्राधिकार उनके पास नहीं है।
जेएमएफसी की अदालत में परिवादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि एसीबी के अधिकारियों ने कूट रचना कर धारा 164 के तहत कथन दर्ज कराए थे। परिवादी ने इसे आपराधिक कृत्य बताते हुए अदालत से अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष (राज्य सरकार) की ओर से अधिवक्ता रवि शर्मा ने तर्क दिया कि यह मामला कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर है। संबंधित अधिकारी अपने शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे, इसलिए उन्हें वैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
परिवाद की स्वीकार्यता के लिए रायपुर कोर्ट में परिवादी और बचाव पक्ष (राज्य सरकार ) के बीच जबरदस्त बहस हुई थी। अधिवक्ता रवि शर्मा ईओडब्ल्यू और फैजल रिजवी परिवादी की ओर से पेश हुए थे। अधिवक्ता रवि शर्मा ने परिवाद के विचारण पर आपत्ति करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की कोर्ट से कहा कि,यह अदालत इस परिवाद को किसी भी स्तर पर सुन नहीं सकती। यह क्षेत्राधिकार का मामला है। जिनके विरुध्द यह परिवाद लाया गया है वे शासन का काम कर रहे थे और ऐसे में शासकीय सेवक को मिलने वाली सुरक्षा उपलब्ध है।
यह परिवाद उस व्यक्ति ने दायर किया है जिनका इस केस से कोई संबंध नहीं है। अधिवक्ता रिजवी ने इसका विरोध करते हुए अदालत से कहा था कि मामले की सुनवाई यह अदालत कर सकती है। यहां क्षेत्राधिकार का मामला ही नहीं है क्योंकि यह परिवाद किसी अदालत से खिलाफ नहीं यह एक अपराध की सूचना दे रहा है।
Published on:
19 Feb 2026 08:21 am
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