
माओवाद पर सियासत (photo source- Patrika)
Raman Singh vs Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य में नक्सल प्रभाव कम होने के दावों के बीच अब इसके खात्मे का श्रेय लेने को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसी कड़ी में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल, भूपेश बघेल ने एक अखबार की कटिंग साझा करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था और लिखा था—“और सबूत चाहिए क्या?” इस पोस्ट में पूर्व सुरक्षा सलाहकार के साक्षात्कार का हवाला दिया गया था। इसके बाद रमन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि “दूसरों पर कीचड़ उछालकर अपने दाग नहीं छुपाए जा सकते।”
उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि “झीरम घाटी नक्सल वारदात के सबूत आपकी जेब में थे, लेकिन अब सिर्फ अखबार की कतरन ही दिखाई जा रही है।” रमन सिंह ने आगे भूपेश बघेल को आईना देखने की नसीहत देते हुए आरोप लगाया कि उनके पांच साल के कार्यकाल में केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हुई और ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब भूपेश बघेल ने वीडियो जारी कर अमित शाह को नक्सलवाद के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी। बघेल का कहना था कि उनकी सरकार के दौरान नक्सल समस्या से निपटने में केंद्र को पूरा सहयोग दिया गया, जबकि संसद में अमित शाह ने इसके उलट बयान दिया। इसके बाद बघेल ने एक और पोस्ट कर अखबार की कटिंग साझा की, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहा है। साल 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सल हमला ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की जान गई थी। इसके बाद से ही राज्य में नक्सल उन्मूलन को लेकर सरकारें लगातार अभियान चलाती रही हैं।
हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास कार्यों के चलते नक्सल गतिविधियों में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ अभी भी जारी है, जिससे यह साफ है कि नक्सलवाद भले कमजोर पड़ा हो, लेकिन उस पर सियासत अभी खत्म नहीं हुई है।
Published on:
01 Apr 2026 08:38 am
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