
धोद में पावर प्लांट विरोध मामला
Raipur रायपुर। Chhattisgarh News: जिले के तहसीलों में भूमि और जमीन के नामांतरण में अंधेरगर्दी चल रही है। पत्रिका ने मामले का खुलासा 7 अक्टूबर को किया था, जिसमें रायपुर तहसील के सैकड़ों प्रकरण में खाली जमीन को फ्लैट लिखकर नामांतरण खारिज करने का खुलासा किया था। तहसीलदारों की गलती पर पटवारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है।
खुद की गलती छुपाने के लिए तहसीलदारों ने पटवारियों की सही जानकारी को गलत बताकर कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है। खुद जमीन को फ्लैट बताकर नामांतरण रोक रहे हैं। दूसरी ओर पटवारी फ्लैट को फ्लैट लिखकर दे रहे हैं तो उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। हालांकि सभी तहसीलदारों को बुलाकर अपर कलेक्टर बीबी पंचभाई ने जमकर फटकार लगाई है। आगे से ऐसी गलती सामने आने पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है।
इन रजिस्ट्री के लिए नोटिस
आई.डी.नं. CG6304505072023003 में खसरा नंबर 44/8 रकबा (0.00017) में म.नं.-1 डी 5वां ब्लाक सिंगापुर सिटी महोबा बाजार, आई.डी.नं. CG6304505072023002 में ख.नं. 44/8 रकबा (0.0135) में, आई.डी.नं. CG6304505072023025 में ख.नं. 54/4 रकबा (0.00079), आई.डी.नं. CG6304505072023010 में ख.नं. 4/2 रकबा (0.0063) के नामांतण प्रतिवेदन में पटवारी ने फ्लैट होने के कारण नामांतरण की आवश्यकता नहीं होना लिखा है। इन सभी प्रकरण के रजिस्ट्री पेपर पत्रिका के पास हैं जो असल में फ्लैट ही हैं। इसके बाद भी पटवारी को नोटिस जारी कर दिया गया है।
इन मामलों में कार्रवाई तो दूर नोटिस तक नहीं
- पटवारी हल्का सेरीखेड़ी में बीते माह 15 प्रकरण में 8 प्रकरण फ्लैट और 7 प्रकरण अपूर्ण, नामांतरण की आवश्यकता नहीं टीप लिखकर प्रकरणों को खारिज किया जा रहा है।
- पटवारी हल्का ग्राम टेमरी के 30 प्रकरणों में से 19 को फ्लैट एंट्री की गई और नामांतरण की आवश्यकता नहीं बताकर खारिज कर दिया गया।
- पटवारी हल्का धरमपुरा का भी यही हाल है। यहां पर 18 नामांतरण के मामलों को भी कृषि भूमि को फ्लैट एंट्री की गई और नामांतरण की आवश्यकता नहीं बताकर खारिज कर दिया गया।
- सड्डू में फौती नामांतरण के प्रकरण में पूर्वाधिकारी का नाम पहले से ही राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। उसमें फ्लैट लिखकर खारिज किया गया है।
आखिर पटवारियों पर कार्रवाई कैसे?
रजिस्ट्री होते ही दस्तावेज ऑनलाइन भुईंया सिस्टम से पटवारी और तसीलदार आईडी में एक साथ पहुंचती है। पटवारी उसमें उक्त भूमि का प्रतिवेदन देता है। तहसीलदार पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर नामांतरण आदेश जारी करता है। इसके बाद नामांतरण प्रक्रिया पूरी हो जाती है। तहसीलदारों ने अलग-अलग कारण बताकर प्रकरण खारिज कर दिया है। आवेदकों को तहसील कार्यालय बुलाया जाता है। जब पटवारी के प्रतिवेदन में ही भूमि की यथा िस्थति लिखी है तो तहसीलदार उसके विपरीत कैसे प्रकरण खारिज कर सकते हैं। इस पर लोक सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
सभी तहसीलदारों से रद्द किए गए नामांतरण की जानकारी मांगी गई है। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, कलेक्टर, रायपुर
Published on:
13 Oct 2023 10:37 am

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