
एल्डरमैन की कुर्सी पर सियासत (photo source- Patrika)
Elderman Appointment: नगर निगमों और नगर पालिकाओं में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हालांकि, करीब दो साल पहले नगरीय निकाय चुनाव संपन्न होने के बावजूद अब तक इनकी नियुक्ति नहीं हो सकी थी। लंबे इंतजार के बाद राज्य शासन ने कुछ नगर निगमों के लिए एल्डरमैनों की सूची जारी कर दी, लेकिन सूची सामने आते ही सियासी विवाद शुरू हो गया।
जानकारी के अनुसार, नियुक्तियों की फाइल लंबे समय तक शासन स्तर पर अटकी रही। बताया जाता है कि वित्त विभाग ने एल्डरमैनों पर होने वाले खर्च और उसकी उपयोगिता को लेकर कुछ सवाल उठाए थे, जिसके कारण फाइल आगे नहीं बढ़ पाई। बाद में भाजपा संगठन ने भी इस विषय पर अपनी राय शासन को दी। हाल के दिनों में राजनीतिक स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद आखिरकार सूची को अंतिम रूप दिया गया।
सूची जारी होते ही सबसे अधिक चर्चा रायपुर नगर निगम के एल्डरमैनों को लेकर शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर दूसरे क्रम में शामिल विनय ओझा के नाम को लेकर लगातार टिप्पणियां की जा रही हैं। कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व महापौर एजाज ढेबर के करीबी रहे व्यक्ति को एल्डरमैन बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के कुछ नेता और समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि विनय ओझा लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे, वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ काम किया और बाद में कांग्रेस में चले गए थे।
चुनाव के दौरान उन्होंने दोबारा भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह ऐसे नेताओं को प्राथमिकता क्यों दी गई, जो अलग-अलग समय में राजनीतिक दल बदलते रहे।
एल्डरमैन सूची को लेकर भाजपा के अंदर भी असंतोष की चर्चा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन के लिए वर्षों तक मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को कोई अवसर नहीं मिला, जबकि अवसरवादी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी गई।
सूत्रों का दावा है कि एल्डरमैन के लिए नाम संगठन से ही मांगे गए थे और वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बाद सूची तैयार हुई। इसके बावजूद जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दे रही है। सूची में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो ठेकेदारी से जुड़े रहे हैं, जबकि कुछ पूर्व पार्षदों को दोबारा एल्डरमैन बना दिया गया। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या नए और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
रायपुर में सूची जारी होने के बावजूद बिलासपुर नगर निगम के एल्डरमैनों की सूची अब तक घोषित नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित नामों को लेकर लगातार मंथन किया गया, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन पाई। बताया जा रहा है कि महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी की ओर से भी कुछ नाम प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं भाजपा संगठन और स्थानीय विधायकों के समर्थकों की ओर से भी अलग-अलग नामों की पैरवी की गई है। इसी कारण सूची पर सहमति बनने में मुश्किल आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने भी सूची को लेकर सहमति बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन संगठन स्तर पर सभी पक्षों को साथ लाने में सफलता नहीं मिल सकी। नगर निगम के भाजपा पार्षद दल के भीतर भी मतभेद की चर्चा है, जिसका असर सूची को अंतिम रूप देने में दिखाई दे रहा है।
रायपुर की सूची को लेकर उठे विवाद के बाद अब राजनीतिक गलियारों की नजर बिलासपुर पर टिक गई है। माना जा रहा है कि यदि सभी पक्षों में सहमति नहीं बनती है तो बिलासपुर की एल्डरमैन सूची जारी होने में अभी और समय लग सकता है। वहीं रायपुर में जारी बहस यह संकेत दे रही है कि एल्डरमैन की नियुक्ति केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठन के भीतर संतुलन साधने की बड़ी राजनीतिक चुनौती भी बन चुकी है।
Published on:
26 Jun 2026 01:32 pm
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