
गोबर पराली से तैयार होगा हरित ईंधन (Photo AI)
CBG Policy 2026: खेतों में बेकार समझी जाने वाली पराली, कृषि अपशिष्ट, गोबर और शहरों का कचरा अब प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरी कर सकता है। राज्य सरकार ने कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। दावा है कि इसके जरिए हर साल 1.65 लाख मीट्रिक टन हरित ईंधन तैयार किया जा सकेगा, जो 2.16 लाख टन पेट्रोल-डीजल के बराबर होगा। इससे न केवल ईंधन आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की जेब भी भरेगी। छत्तीसगढ़ बॉयोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) के मुताबिक नई नीति ऐसे समय आई है जब देशभर में स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में फसल अवशेष, गोबर, पशु अपशिष्ट, नगर निगमों का कचरा, शुगर मिलों का प्रेसमड और अन्य जैविक संसाधन बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। अब इन्हें ऊर्जा में बदलने की तैयारी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्पादन बढऩे से हर साल करीब 118 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बच सकती है। वहीं किसानों को फसल अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय होगी। प्लांट से निकलने वाली ऑर्गेनिक खाद जैविक खेती को भी बढ़ावा देगी। राज्य में इस सेक्टर को लेकर हलचल पहले ही शुरू हो चुकी है। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में बीपीसीएल और गेल के सहयोग से सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि निजी क्षेत्र से करीब 3600 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।
--1.65 लाख टन सीबीजी उत्पादन क्षमता
--2.16 लाख टन पेट्रोल-डीजल के बराबर ईंधन
-- 118 करोड़ रुपए की संभावित बचत
-पराली और कृषि अवशेषों की बिक्री
-अतिरिक्त आय का स्रोत
-जैविक खाद से खेती को फायदा
--रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में परियोजनाएं प्रगति पर।
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बॉयोगैस नीति 2026 को मंजूरी दे दी है। सीबीजी से आने वाले दिनों में 118 करोड़ रुपए विदेशी करेंसी की बचत हो सकती है, वहीं इस सेक्टर के लिए राज्य को 3600 करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है।
-सुमित सरकार
सीईओ, सीबीडीए
Published on:
26 Jun 2026 12:20 pm
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