
Congress Protest Raipur(photo-patrika)
Congress Protest Raipur: छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क बढ़ाए जाने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस निर्णय के विरोध में राजधानी रायपुर स्थित शिक्षा विभाग कार्यालय का घेराव किया और बढ़ी हुई फीस को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जॉइंट डायरेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह निर्णय आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने रायपुर में शिक्षा विभाग कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बढ़ी हुई स्थानीय शुल्क व्यवस्था को छात्र विरोधी बताया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर पहले से ही आर्थिक दबाव है और अब शुल्क बढ़ाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में सरकारी स्कूलों में फीस बढ़ाना गलत निर्णय है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा को महंगा बनाने के बजाय उसे और सुलभ करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 से सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क में वृद्धि की गई है। आदेश के तहत हाई स्कूल के छात्रों से अब 410 रुपये के स्थान पर 500 रुपये शुल्क लिया जाएगा, जिसमें 90 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं हायर सेकेंडरी स्कूलों में शुल्क 445 रुपये से बढ़ाकर 550 रुपये कर दिया गया है, यानी 105 रुपये की वृद्धि की गई है। यह निर्णय सरकारी स्कूलों के साथ-साथ स्वामी आत्मानंद स्कूलों और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होगा।
छत्तीसगढ़ में करीब 56 हजार स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 56 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से 44 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। ऐसे में शुल्क वृद्धि से बड़ी संख्या में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई अभिभावक संगठनों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई है।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी यह आदेश आगामी शिक्षा सत्र से लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुल्क वृद्धि शैक्षणिक व्यवस्थाओं और सुविधाओं के सुधार के लिए जरूरी है, जबकि विपक्ष और अभिभावक संगठनों ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए विरोध जताया है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि यदि बढ़ी हुई फीस वापस नहीं ली गई तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। पार्टी ने इसे गरीब और मध्यम वर्ग विरोधी निर्णय करार दिया है।
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार विरोध को देखते हुए शुल्क वृद्धि वापस लेती है या अपना निर्णय यथावत रखती है।
Updated on:
22 May 2026 05:11 pm
Published on:
22 May 2026 05:10 pm
