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इन दो सीटों में मिली हार ने छत्तीसगढ़ BJP की बढ़ाई टेंशन, खड़े किए कई सवाल, नेताओं से मांगी रिपोर्ट

Chhattisgarh News: उपचुनाव में बीजेपी ने पांच में से तीन सीटों में जीत दर्ज की है। वहीं दो सीटों में मिली हार ने बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। इसे लेकर नेताओं से रिपोर्ट मांगे है..

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Chhattisgarh BJP ( File Photo )

Chhattisgarh News: नगरीय निकायों के उपचुनाव में पांच में से तीन सीटों पर जीत दर्ज करने के बावजूद भाजपा संगठन पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है। पार्टी ने चुनाव परिणामों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। जीत वाली सीटों के साथ-साथ उन क्षेत्रों पर भी फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा या अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश संगठन ने मंडल और जिला स्तर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। संगठन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि जिन क्षेत्रों में पार्टी कमजोर रही, वहां इसके पीछे स्थानीय कारण क्या थे। खासतौर पर यह पड़ताल की जा रही है कि कहीं जनता में स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों या संगठन पदाधिकारियों के प्रति नाराजगी तो चुनावी नतीजों को प्रभावित नहीं कर गई।

Chhattisgarh News: बूथ स्तर से लिया जा रहा फीडबैक

भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद पार्टी के प्रति जनता का रुझान सकारात्मक है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, विकास कार्यों की गति और जनता से संवाद की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न है। इसी कारण संगठन अब बूथ स्तर तक फीडबैक जुटाने में लगा हुआ है।

विपक्ष की रणनीति का भी विश्लेषण हो रहा

पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि कुछ क्षेत्रों में गुटबाजी, टिकट चयन और स्थानीय मुद्दों का असर देखने को मिला। ऐसे स्थानों की पहचान कर आगामी चुनावों से पहले सुधारात्मक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। मंडलों से मांगी गई रिपोर्ट में मतदान प्रतिशत, बूथवार प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विपक्ष की रणनीति का भी विश्लेषण शामिल किया गया है।

कमजोरी को नहीं किया जा सकता नजर अंदाज

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के साथ-साथ भविष्य के बड़े चुनावों को देखते हुए किसी भी तरह की कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। यही वजह है कि जीत के बावजूद संगठन आत्ममंथन के मोड पर है। सूत्र बताते हैं कि समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश संगठन की महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, जिसमें कमजोर क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति बनाई जाएगी।

साथ ही जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को लेकर भी फीडबैक पर चर्चा होने की संभावना है। भाजपा उपचुनाव के नतीजों को केवल जीत-हार के नजरिए से नहीं, बल्कि आगामी चुनावी तैयारी के पैमाने पर देख रही है। यही कारण है कि तीन सीटों की जीत के बावजूद संगठन अब यह जानने में जुटा है कि बाकी दो सीटों पर आखिर चूक कहां हुई।