
संघर्षों से सजी प्रेम कहानी (photo source- Patrika)
Valentine's Day: रायपुर/ताबीर हुसैन। डॉक्टर केके साहू की प्रेम कहानी पढ़ाई, संघर्ष, जातिगत चुनौतियों और अटूट विश्वास की मिसाल है। ग्यारहवीं-बारहवीं में संध्या शर्मा शुरू हुई जान-पहचान धीरे धीरे गहरी दोस्ती में बदली और फिर उसी दोस्ती ने जीवनसाथी का रूप ले लिया। इस सफर में मेडिकल पढ़ाई का दबाव, परिवार की असहमति, कोर्ट मैरिज और फिर सुपर स्पेशलाइजेशन तक का लंबा रास्ता शामिल रहा।
केके साहू बायो मैथा के छात्र थे, जबकि संध्या मैथ्स ग्रुप में थीं। स्कूल में दोनों की सीट अलग थी, बस इतना पता था कि क्लास में वह सेकंड आती थीं और केके फर्स्ट। असली बातचीत कोचिंग के दौरान शुरू हुई, जब दोनों साथ आने जाने लगे।
केके का चयन रायपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। उनका परिवार भी उसी दौरान रायपुर शिफ्ट हो गया। घर के पास रहने से मुलाकातें बढ़ीं। उस समय तक शादी का विचार नहीं था, लेकिन अपनापन गहराता गया। उन्होंने होम्योपैथी की पढ़ाई शुरू की, वहीं केके एमबीबीएस पूरा कर आगे बढ़ते गए। इंटर्नशिप के बाद बिलासपुर मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति मिली। संयोग से उनके पिता का ट्रांसफर भी वहीं हो गया, जिससे संपर्क और मजबूत हुआ।
जब शादी की बात आई तो सबसे बड़ी बाधा जाति बनी। लड़की के परिवार ने साफ कहा कि समाज की समस्या आएगी और केके के घरवालों ने भी शुरुआत में मना कर दिया। कई बार चर्चा हुई। अंत में दोनों ने तय किया कि वे कोर्ट मैरिज करेंगे। शादी के समय दोनों परिवारों से कोई शामिल नहीं हुआ। पांच साल तक लड़की के घर में बातचीत बंद रही। केके के घरवालों ने कुछ महीनों बाद उन्हें स्वीकार कर लिया, हालांकि मन में नाराजगी थी।
शादी के समय केके नौकरी कर रहे थे। घरवालों की नाराजगी इस बात को लेकर भी थी कि उन्होंने पीजी से पहले शादी कर ली। लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। शादी के बाद भी वे पढ़ाते रहे और खुद तैयारी करते रहे। एक साल के भीतर उनका चयन एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) में हो गया। जिस दिन एमएस का रिजल्ट आया, उसी दिन उनके घर पहले बच्चे का जन्म भी हुआ। इसके बाद भी उन्होंने मेहनत जारी रखी और एमसीएच, जो सर्जरी का सबसे कठिन स्तर माना जाता है, पेडियाट्रिक सर्जरी में राजस्थान से पूरा किया।
एमएस और एमसीएच के दौरान ड्यूटी इतनी कठिन थी कि घर आने का समय भी मुश्किल से मिलता था। लेकिन उनकी पत्नी ने हर कदम पर साथ दिया, घर संभाला, बच्चों की जिम्मेदारी उठाई और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। आज केके साहू मानते हैं कि अगर वह साथ न देतीं तो मेडिकल करियर की यह ऊंचाई हासिल करना संभव नहीं था। यह कहानी सिर्फ प्रेम की नहीं, बल्कि भरोसे, धैर्य और एक दूसरे के सपनों को अपना मान लेने की कहानी है।
Published on:
14 Feb 2026 12:54 pm
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