
Coronavirus situation worsen in Delhi, CM Kejriwal orders immediate increase in beds
रायपुर। कोरोना की दूसरी लहर का कहर- 8 को 43, 9 अप्रैल को 50 मृतकों का रायपुर में कोरोना प्रोटोकॉल से दाह संस्काररायपुर.राजधानी रायपुर मैं कोरोना वायरस कहर बनकर टूट रहा है। परिवार के परिवार बिखर रहे हैं। बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उजड़ रहा है। घर का एकमात्र कमाने वाला साथ छोड़कर चला गया। स्थिति यह है कि 8 दिन में 162 मरीजों ने कोरोना से लड़ते हुए दमतोड़ दिया।
श्मशान घाटों में लाशों की कतार लगी हुई है। यहां बने शेड के नीचे जलाने की जगह कम पड़ी तो खुली जगह में चिताएं सजाई जा रही हैं। इलेक्ट्रानिक मशीन से दाह संस्कार का बोझ नहीं उठा पा रही। स्थिति यह है कि अंतिम संस्कार के बाद परिजनों को अपनों की 5 अस्थियां दी जा रही हैं, ताकि वे उनका विसर्जन कर सकें। राख (खारी) को पास में गड्ढा खोदकर डंप किया जा रहा है। इस कोरोना काल में अकेले रायपुर में 1076 परिवारों ने अपनों को खो दिया। न जानें यह सिलसिला कब थमकेगा। हालांकि यह भी सच है कि हम भी मौतों के लिए जिम्मेदार है। आज तक अगर आपने नियमों का पालन नहीं किया तो करें और करवाएं, क्योंकि यह महामारी का दौर है। शत्रू अज्ञात है।
कोरोना मेरा सब कुछ छीनकर ले गया
9 अप्रैल को अनूप की बड़ी बहन पुष्पा अपुरकर की कोरोना से मौत हो गई। शव एंबुलेंस में मारवाड़ी श्मशानघाट लाया गया। जहां अनूप और परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे। अनूप बॉकर से चलते हैं, वे एंबूलेंस की खिड़की से अपनी बहन को सफेद कवर में लिपटा देखा और जोर-जोर से रोने लगे, बोले- 'बहन तू मुझे छोड़कर चली गई। मैं तेरे बिना जिंदा नहीं रह पाऊंगा। यह कोरोना मेरा सबकुछ छीनकर ले गया। कोई मुझे मेरी बहन का चेहरा दिखा दो... हे, भगवान तू हमें किस गुनाह की सजा दे रहा है...।
मर्चुरी में लाशें रखीं, अपने नहीं आ रहे- आंबेडकर अस्पताल मर्चुरी में 9 लाशें रखी हैं। मगर, परिजन न इनके दाह संस्कार करवाने आ रहे हैं न ही फोन उठा रहे हैं। मानों ये अपनों को भूल गए हैं। निश्चित समय के बाद पुलिस करवाएगी दाह संस्कार।
कोरोना किसी को नहीं छोड़ रहा
दूसरी लहर में पुलिस अधिकारी, कलाकार, संगीतकार, नेता, कर्मचारी हर वर्ग और हर आयुवर्ग के लोग शिकार हो रहे हैं। सतर्कता ही बचाव है।
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दिल दहला देने वाला मंजर-
देवेंद्र नगर श्मशानघाट
यहां 29 मई 2020 को कोरोना से मरने वाले राज्य के पहले व्यक्ति, बिरगांव निवासी मजदूर का अंतिम संस्कार किया गया था। तब से आज तक 5-7 दिन ही रहे, जब कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई। वरना हर दिन यहां चिताएं जलीं। अब तो एक दिन में 5-5 लाशें लाई जा रही हैं। 2 शेड के नीचे जगह कम पड़ी तो लाशों को खुली जगह पर रखकर जलाया जा रहा है।
मारवाड़ी मुक्तिधाम
यहां इलेक्ट्रानिक मशीन से तो दाह संस्कार हो रहा है, मगर लाशें इतनी आ रही हैं कि पास में नए शेड का निर्माण करवाया गया है, ताकि प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके। यहां रोते-बिलखते परिजनों को देखकर आप दहल उठेंगे क्योंकि जिस अपने को कोरोना संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती करवाया, वहां से खबर आई कि मुक्तिधाम पहुंचें। सोचिए, ऐसे परिवार पर क्या गुजरती होगी?
8 श्मशानघाटों में हो रहा अंतिम संस्कार
मार्च के पहले हफ्ते में मौतें कम थी, तो देवेंद्र नगर और मारवाड़ी श्मशानघाट में दाह संस्कार हो रहा था। मगर, आज इनके अलावा टाटीबंध, नया रायपुर, गोकुल नगर, रामनगर, गोंदवारा, टिकरापारा में नगर निगम द्वारा अंतिम संस्कार करवाया जा रहा है। मौदहापारा (कब्रिस्तान) और सेंट पॉल कब्रिस्तान में शव दफनाए जा रहे हैं। खपराभट्टी श्मशान घाट में भी तैयारी है।
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हर दिन स्थिति भयावह होती चली जा रही है। घरों और अस्पतालों से शवों को ले जा रहे हैं। 10 जगहों पर अंतिम संस्कार और दफनाने की प्रक्रिया की जा रही है।
- पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त, नगर निगम
Published on:
10 Apr 2021 08:48 pm
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