
Raipur Ganeshotsav 2026: कहीं सोने का मुकुट तो कहीं लेटे हुए बप्पा!(photo-canva create patrika)
Raipur Ganeshotsav 2026: गणेशोत्सव आते ही रायपुर की गलियां और चौक-चौराहे भव्य पंडालों से सज जाते हैं। कहीं बप्पा का दरबार राजसी अंदाज में नजर आता है, तो कहीं पूरी तरह अलग थीम के बीच गणेश जी की स्थापना की जाती है। इस बार भी शहर में कई ऐसे पंडाल चर्चा में हैं, जिनकी मूर्तियां और थीम लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
कहीं सोने के मुकुट वाले गणपति आकर्षण का केंद्र हैं, तो कहीं लेटे हुए गणेश, सिक्कों से सजे बप्पा, केदारनाथ और राम दरबार थीम लोगों को अपनी ओर खींच रही है। खास बात यह है कि इन सभी स्वरूपों के पीछे अलग-अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश भी जुड़े हैं। अगर आप भी इस गणेशोत्सव में रायपुर के खास पंडाल देखने का प्लान बना रहे हैं, तो ये 10 गणेश स्वरूप आपकी लिस्ट में जरूर होने चाहिए।
रायपुर के पुराने और चर्चित गणेश पंडालों में गोल बाजार का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल की ओर से सजाए जाने वाले इस पंडाल में बप्पा का भव्य स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां गणेश जी को सोने के मुकुट से सजाने की परंपरा विशेष चर्चा में रहती है। बताया जाता है कि मुकुट में बड़ी मात्रा में सोने का इस्तेमाल किया जाता है। बप्पा का यह राजसी स्वरूप ऐश्वर्य, समृद्धि और भक्तों की आस्था का प्रतीक माना जाता है।
लाखे नगर का गणेश पंडाल अपनी अनोखी मूर्ति के लिए चर्चा में रहा है। यहां लगभग 20 फीट के लेटे हुए गणपति का स्वरूप तैयार किया गया है। यह स्वरूप प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी की मुद्रा से प्रेरित बताया जाता है। सामान्य रूप से बैठे या खड़े गणेश जी से अलग यह स्वरूप विश्राम, शांति और संतुलन का संदेश देता है।
देवपुरी का गणेश पंडाल भी अपनी अनोखी सजावट के कारण लोगों को आकर्षित करता है। यहां बप्पा के स्वरूप को 50 हजार से ज्यादा सिक्कों से सजाया गया है। ₹1 से लेकर ₹20 तक के सिक्कों से तैयार यह स्वरूप देखने में बेहद अलग नजर आता है। भक्तों के बीच इसे धन, समृद्धि और आर्थिक सुख-शांति की कामना से जोड़कर देखा जा रहा है।
समता कॉलोनी में इस बार गणेश पंडाल को श्री जगन्नाथ मंदिर की थीम पर सजाया गया है। यहां बप्पा का स्वरूप भगवान जगन्नाथ की संस्कृति और रंगों से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। यह थीम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के बीच एकात्मता और भक्ति के भाव को दर्शाती है। पंडाल की सजावट और गणेश जी का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।
गंजपारा का पंडाल इस बार कांतारा और दैवीय संस्कृति की थीम पर आधारित है। यहां गणेश जी का स्वरूप प्रकृति और स्थानीय लोक परंपराओं से जुड़ा हुआ नजर आता है। यह थीम आधुनिक सिनेमा की लोकप्रियता के साथ लोक संस्कृति, प्रकृति और मिट्टी से जुड़े जीवन की ओर भी लोगों का ध्यान खींचती है।
सरस्वती नगर, कोटा में गणेश जी को केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किए गए पंडाल में विराजमान किया गया है। बप्पा के इस स्वरूप को भगवान शिव के परिवार और उनकी आध्यात्मिक परंपरा से जोड़कर देखा जा सकता है। केदारनाथ जैसी धार्मिक पृष्ठभूमि के बीच गणेश जी की स्थापना भक्तों को शिव-परिवार और आध्यात्मिक आस्था का भाव देती है।
गुढ़ियारी का गणेश पंडाल राम दरबार थीम पर आधारित है। भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ गणेश जी का स्वरूप यहां विशेष आकर्षण का केंद्र है। राम दरबार के बीच विघ्नहर्ता की मौजूदगी धर्म, मर्यादा, परिवार और एकजुटता का संदेश देती है।
रामसागर पारा में गणेश जी का स्वरूप क्रिस्टल और नवरत्नों की सजावट के कारण अलग नजर आता है। क्रिस्टल को जहां स्पष्टता और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है, वहीं नवरत्नों का संबंध पारंपरिक रूप से नवग्रहों और ज्योतिषीय मान्यताओं से माना जाता है। यही वजह है कि यह स्वरूप श्रद्धालुओं के साथ-साथ पंडाल देखने पहुंचने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण बना हुआ है।
दूधाधारी मठ के पीछे स्थित श्री बालाजी पंडाल में बप्पा को कष्टभंजन बालाजी के स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। गणेश जी को हनुमान जी के स्वरूप से जोड़कर तैयार की गई यह थीम भक्तों को संकटों से मुक्ति और नकारात्मकता से रक्षा का धार्मिक भाव देती है।
रायपुर के एक अन्य पंडाल में इस बार भूतिया और रहस्यमयी दुनिया की थीम के बीच गणेश जी की स्थापना की गई है। डरावने और रहस्यमयी माहौल के बीच बप्पा का स्वरूप एक रक्षक के रूप में दिखाई देता है। इस थीम का सबसे खास संदेश यही है कि डर और नकारात्मकता के बीच भी आस्था इंसान को हिम्मत देती है। यही वजह है कि इस तरह के थीम पंडाल युवाओं के बीच खास आकर्षण पैदा करते हैं।
रायपुर के गणेशोत्सव की खासियत सिर्फ विशाल मूर्तियां और आकर्षक सजावट नहीं है। हर पंडाल के पीछे कोई न कोई धार्मिक कथा, सांस्कृतिक विचार या सामाजिक संदेश दिखाई देता है। यही वजह है कि गोल बाजार के राजसी बप्पा से लेकर लाखे नगर के लेटे हुए गणपति और रहस्यमयी थीम वाले पंडाल तक, रायपुर का गणेशोत्सव हर साल अपने अलग-अलग स्वरूपों से लोगों को आकर्षित करता है।
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Updated on:
19 Sep 2026, 1:27 PM IST
Published on:
19 Sep 2026, 1:26 PM IST
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