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Chhattisgarh News: भीषण गर्मी में भाप हुए जलाशय, एक महीने में 64 से 49% पर आया गंगरेल का पानी, किसानों की बढ़ी चिंता

DhamtariNews: बढ़ते तापमान और पानी की खपत के कारण जलाशयों का पानी तेजी से कम हो रहा है, जिससे आगामी खरीफ सीजन को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। स
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रायपुर

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Love Sonkar

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Updated: 2 Jun 2026, 9:26 AM IST

Chhattisgarh News

बांध सूखने से किसानो की चिंता बढ़ी (Photo AI)

Chhattisgarh News: प्रदेश में अप्रैल और मई में रेकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का सीधा और जानलेवा असर अब प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर दिखने लगा है। तेज तपिश और चिलचिलाती धूप के कारण बांधों का जलस्तर बेहद तेजी से नीचे गिर रहा है, जिससे कई जलाशय सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज एक महीने पहले तक धमतरी स्थित गंगरेल बांध में जहां 64 फीसदी पानी मौजूद था, वह अब घटकर केवल 49 फीसदी रह गया है। गंगरेल के अलावा सिकासार, तांदुला, केलो और गोंदली जैसे बड़े बांधों में भी पानी का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरा है। राहत की बात बस इतनी है कि शेष अन्य बांधों में अभी पानी की स्थिति नियंत्रण में है।

Chhattisgarh News: सूखी हवा और लू बनी 'स्पंज', एक महीने में बदले हालात

इस साल तापमान सामान्य से काफी अधिक (44-45 डिग्री सेल्सियस) रहने के कारण जलाशयों में वाष्पीकरण की दर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। असल में, पानी जिन सूक्ष्म अणुओं से मिलकर बनता है, अत्यधिक गर्मी और तापमान बढ़ने पर वे भीतर ही भीतर तेजी से गति करने लगते हैं। रायपुर और आसपास के मैदानी इलाकों में पड़ी भीषण गर्मी से इन अणुओं को इतनी ऊर्जा मिल गई कि वे पानी की सतह को तोड़कर हवा में विलीन हो रहे हैं मौसम विज्ञानियों के अनुसार, जब तापमान बढ़ता है और हवा रूखी होती है, तो वह एक 'स्पंज' की तरह काम करती है। यह शुष्क हवा जैसे ही तालाब या बांध के ऊपर से गुजरती है, भाप को सोख लेती है। यदि हवा की गति केवल 10 किमी प्रति घंटा भी हो, तो किसी बड़े जलाशय से रोजाना 12 से 15 हजार लीटर पानी हवा में गायब हो जाता है। यानी महीने भर में एक पूरा स्वीमिंग पूल जितना पानी बिना किसी इस्तेमाल के उड़ रहा है। जो तालाब चौड़े और उथले हैं, वहां धूप सीधे नीचे तक पहुंचने से वे सबसे पहले सूख रहे हैं।

कम बारिश का पूर्वानुमान, किसानों की बढ़ी चिंता

अप्रैल महीने तक पिछले वर्षों की तुलना में बांधों में पानी का बेहतर स्टॉक था, लेकिन मई की झुलसाने वाली गर्मी ने पूरे हालात बदल दिए। इधर, मौसम विभाग द्वारा इस साल सामान्य से कम (लगभग 90 फीसदी) बारिश के पूर्वानुमान ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यदि मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो इन खाली होते बांधों को दोबारा भरना नामुमकिन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में खरीफ फसलों को बचाने के लिए खेतों को बांधों से अलग से पानी देने की जरूरत पड़ेगी, जिससे जल संकट और अधिक गहरा सकता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि पानी की मौजूदा मात्रा अभी पूरी तरह निराशाजनक नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होना बेहद जरूरी है।


प्रदेश के प्रमुख बांध की स्थिति अप्रैल जून में

मिनी माता बांगों 59.09 56.55

गंगरेल 64.39 48.97

तांदुला 49.75 46.41
दुधावा 81.58 77.51
सिकासार 51.27 37.91

सोंढूर 66.77 62.85

मुरूमसिल्ली 84.75 82.30
कोडार 24.66 29.61
केलो 40.45 19.59

गोंदली 73.26 50.42

(पानी की स्थिति 29 अप्रैल व 1 जून की प्रतिशत में)

गरियाबंद-बस्तर में बारिश, राजधानी में छाए बादल

पिछले 24 घंटे में गरियाबंद जिले व बस्तर संभाग के कुछ स्थानों पर झमाझम बारिश हुई है। राजधानी में बादल छाने से भीषण गर्मी से राहत तो है, लेकिन उमस ने परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार इन दिनों हो रही बारिश प्री मानसूनी नहीं है, बल्कि बने सिस्टम के कारण है। गरियाबंद में 3, सुकमा, रामानुजनगर में 2-2, अमलीपदर व जगदलपुर में एक-एक सेमी पानी गिरा। 3 जून से अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की वृद्धि होने की संभावना है। प्रदेश में अगले 5 दिन अंधड़ के साथ बारिश होगी। कहीं-कहीं आकाशीय बिजली भी गिर सकती हैं। 2 जून को रायपुर में अंधड़ के साथ हल्की बारिश भी हो सकती है।