
PM Surya Ghar Yojana: प्रदेश में झुलसाने वाली गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच एक नई क्रांति आकार ले रही है। प्रदेश के घरेलू उपभोक्ता अब अपनी छतों पर बिजली की खेती कर रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश में पारंपरिक बिजली का एक मजबूत और किफायती विकल्प बनकर उभरी है। भीषण गर्मी के इस सीजन में छतों पर लगे सोलर पैनलों से रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन दर्ज किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब का बोझ हल्का हो रहा है, बल्कि पर्यावरण भी सांस ले पा रहा है।
छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 185501 उपभोक्ताओं ने सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए घरेलू आवेदन किए हैं। इनमें से 57702 घरों में कनेक्शन चालू भी हो चुके हैं, जिससे प्रतिमाह लगभग 28 मिलियन (2.8 करोड़) यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बिजली कंपनी की सोलर ऊर्जा शाखा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक सूबे के 1.30 लाख घरों को इस योजना से जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का सीधा लाभ मिल रहा है।
कोयले से पैदा होने वाली बिजली के मुकाबले सोलर एनर्जी पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो रही है। थर्मल पावर प्लांट में 1 यूनिट बिजली बनाने में करीब 0.82 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। छत्तीसगढ़ में सोलर पैनलों से हर महीने पैदा हो रही 28 मिलियन यूनिट बिजली के कारण 22 लाख किलोग्राम का उत्सर्जन कम हो रहा है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदूषण में आ रही यह कमी प्रदेश में 10 लाख पेड़ बचाने के बराबर है।
उपभोक्ताओं के बढ़ते रुझान को देखते हुए बिजली कंपनी बेहद मुस्तैद है। आवेदन करने के मात्र 24 घंटे के भीतर कनेक्शन के लिए अप्रूवल जारी किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में हर दिन औसतन 281 घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इस योजना में दोगुनी सब्सिडी की बड़ी भूमिका है। केंद्र सरकार 1 किलोवाट पर 30 हजार रुपए, 2 किलोवाट पर 60 हजार और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78 हजार की सब्सिडी दी जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अपनी ओर से 1 किलोवाट पर 15 हजार और 2 व 3 किलोवाट के प्लांट पर 30 हजार की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। 3 किलोवाट तक का कनेक्शन लेने पर उपभोक्ता को दोनों सरकारों की तरफ से कुल मिलाकर 1.08 लाख की भारी सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
इस योजना की सबसे खूबसूरत बात यह है कि उपभोक्ता अब केवल कंज्यूमर नहीं बल्कि प्रोड्यूसर बन गए हैं। 3 किलोवाट तक के कनेक्शन में अनुकूल तापमान (22 से 30 डिग्री) होने पर प्रतिदिन प्रति किलोवाट 4 यूनिट तक बिजली बनती है। घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद जो बिजली बच जाएगी, उसे उपभोक्ता ग्रिड को बेच सकेंगे। विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय दरों के मुताबिक, वर्ष में एक बार 2.50 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से इस बची हुई बिजली का भुगतान सीधे उपभोक्ता को किया जाएगा।
महंगी होती बिजली दरों के कारण सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और भारी औद्योगिक इकाइयां भी सोलर की तरफ कदम बढ़ा चुकी हैं। वर्तमान में सूबे के भीतर करीब 2000 कमर्शियल कनेक्शन लग चुके हैं। इसके अलावा, सिलतरा के आयरन उद्योगों, सीमेंट फैक्ट्रियों और एसईसीएल जैसे बड़े उपक्रमों में 1100 मेगावाट से अधिक क्षमता के ओपन एक्सेस सोलर प्लांट काम कर रहे हैं। 25 साल की लंबी उम्र वाले इन सोलर पैनलों की त्वरित सब्सिडी सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होने से छत्तीसगढ़ का ऊर्जा परिदृश्य पूरी तरह बदल रहा है।
पीएम सूर्यघर घरेलू आवेदन मिले- 185501
कनेक्शन लगे- 57702
पीएम सूर्यघर कामर्शियल- करीब 2000
सब्सिडी दी गई- 50416
सोलर पैनल की उम्र- 25 साल
सोलर से बिजली उत्पादन
पीएम सूर्यघर घरेलू से उत्पादन- 28 मिलियन यूनिट प्रतिमाह
औद्योगिक इकाईयों में ओपन एक्सेस प्लांट- 1100 से ज्यादा मेगावाट
Updated on:
23 May 2026 08:51 am
Published on:
23 May 2026 08:40 am
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