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दो सालों से बन रहा कुंड अब तक नहीं हुआ पूरा, अधभरे तालाबों में होगा गणपति का विसर्जन

विगत दो वर्षों से खारुन नदी के किनारे डेढ़ करोड़ की लागत से जो विसर्जन कुंड बनाया जा रहा है, वह अभी तक तैयार नहीं किया जा सका
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रायपुर

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Deepak Sahu

•

Updated: 9 Sep 2018, 10:04 AM IST

ganpati visarjan kund

दो सालों से बन रहा कुंड अब तक नही हुआ पूरा, अधभरे तालाबों में होगा गणपति का विसर्जन

रायपुर. नगर निगम शहर के तालाबों और खारुन नदी के संरक्षण का केवल दावा कर रहा है। लेकिन, विसर्जन कुंड में ही गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हो सके, एेसा कोई पुख्ता इंतजाम आज तक नहीं किया जा सका। हैरानी की बात यह है कि विगत दो वर्षों से खारुन नदी के किनारे डेढ़ करोड़ की लागत से जो विसर्जन कुंड बनाया जा रहा है, वह अभी तक तैयार नहीं किया जा सका।

दूसरी तरफ शहर के तालाबों की स्थिति चिंताजनक है। भरे भादो महीने में तालाबों का पेट आधे से भी अधिक खाली है। एेसी व्यवस्थाओं के बीच निगम प्रशासन दावा करता है कि प्रतिमाओं का विसर्जन कुंड में कराया जाना है। कुंड तैयार न होने से लोग अधभरे तालाबों में ही प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे।

गणेशोत्सव का पर्व नजदीक है। शहर में जगह-जगह झांकियां और पूजा पंडाल तैयार करने में गणेशोत्सव समितियां पूरी तरह से जुटी हुई हैं। गणेश चतुर्थी तिथि पर १३ सितंबर को घरों से लेकर झांकियां और पूजा पंडालों में मंगलमूर्ति की छोटी-बड़ी प्रतिमाएं विराजेंगी। उत्सव के 11वें दिन अनंत चतुर्दशी तिथि पर शहर के मोहल्लों और कॉलोनियों से 10 हजार से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। गणेशोत्सव के समापन के 15 दिन बाद दुर्गा पूजा उत्सव शुरू होगा। तालाबों व खारुन नदी के पास विसर्जन कुंड नहीं बनने से हजारों श्रद्धालुओं को आसपास के तालाबों में या फिर खारुन नदी के विसर्जन घाट में प्रतिमाएं विसर्जित करना पड़ता है।

खारुन नदी राजधानी की जीवन रेखा मानी जाती है। इसी नदी के भाठागांव एनीकट से शहर के लोगों की प्यास बुझती है। लेकिन नगर निगम प्रशासन द्वारा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कुंड का निर्माण नहीं कराए जाने से नदी का एक पूरा हिस्सा प्रतिमाओं के अवशेषों के ढेर से पट जाता है। कई दिनों तक सफाई नहीं होने से मूर्तियों लगी लकडि़यां और पैरा नदी के पानी में तैरता रहता है।

नगर निगम प्रशासन प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान केवल गिनती के तालाबों पर नजर रखता है। मरीन ड्राइव तेलीबांधा तालाब, बूढ़ापारा तालाब सहित दो-चार तालाबों के आस-पास अमला नजर आता है, जो लोगों को प्रतिमाएं गाड़ी में रखवाने का काम करता है। बाकी तालाबों की सुध नहीं लेता है। एेसी स्थिति में मोहल्लों और कॉलोनियों के लिए अपने आसपास के तालाबों में मूर्तियां और पूजन सामग्री का विसर्जन करते हैं।

खारुन नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए अमलेश्वर घाट को जोडऩे वाली पुल के करीब लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से विसर्जन कुंड का निर्माण दो वर्षों से चल रहा है। वह काम अभी तक चल ही रहा है। ऊपरी हिस्से और चारों तरफ घेरा बनाने का काम अधूरा है।

नगर निगम प्रशासन को त्योहार नजदीक आने पर विसर्जन कुंड की याद आती है। विगत ७ से ८ साल पहले महापौर किरणमयी नायक के समय ही सभी तालाबों में विसर्जन कुंड बनाने पर जोर-शोर से हल्ला हुआ। फाइल भी चली। लेकिन शहर के प्रमुख तालाबों में ही विसर्जन कुंड आकार नहीं ले सका।

महापौर प्रमोद दुबे ने बताया कि तालाब शहर की धरोहर हैं। उनके संरक्षण और प्रदूषित होने से बचाने की जिम्मेदारी नगर निगम के साथ ही आम लोगों की भी है। मूर्तियों के विसर्जन के समय व्यवस्था कराई जाएगी। खारुन नदी के किनारे कुंड का निर्माण लगभग पूरा हो गया है।