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AI की एंट्री से परीक्षा सिस्टम सख्त, UPSC ने पकड़े 569 संदिग्ध आवेदन, क्या अब बदलेगा CGPSC-व्यापमं का सिस्टम?

AI in Government Exams: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू किया है। इस तकनीक की मदद से आयोग ने 569 संदिग्ध और डुप्लीकेट आवेदनों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक चरण में ही रोक दिया है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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ताबीर हुसैन

Jun 28, 2026

CGPSC exam system AI

AI की एंट्री से परीक्षा सिस्टम सख्त (फोटो सोर्स- AI)

रायपुर@ताबीर हुसैन। UPSC AI Screening: प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने बड़ा कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से 569 संदिग्ध और डुप्लीकेट आवेदनों को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया है। देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा एजेंसी की इस कार्रवाई ने परीक्षा सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इसी के साथ सवाल उठने लगा है कि क्या छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और व्यापम भी भविष्य में ऐसी उन्नत तकनीकों को अपनाएंगे?

तकनीकी खामियों का उठाते हैं फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट, फर्जी आवेदन और पहचान छिपाकर कई बार फॉर्म भरने जैसी गड़बडिय़ां अक्सर तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर की जाती हैं। वर्तमान में अधिकांश राज्य स्तरीय परीक्षाएं बेसिक डेटा मैचिंग सिस्टम पर निर्भर हैं, जहां एडवांस एआई आधारित जांच व्यवस्था का अभाव है। ऐसे में अलग-अलग पहचान पत्रों या बदले हुए क्रेडेंशियल्स के जरिए किए गए फर्जी प्रयासों को पकडऩा चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

क्या कहते हैं विद्यार्थी

रायपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि जब यूपीएससी जैसी संस्था तकनीक के जरिए आवेदन स्तर पर ही गड़बड़ियों को रोक सकती है, तो राज्य की भर्ती परीक्षाओं में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सीजीपीएससी और व्यापम के मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म में एआई आधारित डुप्लीकेट डिटेक्शन और डेटा एनालिटिक्स टूल जोड़ना कठिन नहीं है। इससे परीक्षा शुरू होने से पहले ही संदिग्ध प्रोफाइल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा सकता है।

तकनीक के साथ मानवीय निगरानी भी जरूरी

आज प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। अगर यूपीएससी जैसी संस्थाएं एआई जैसी आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही हैं, तो सीजीपीएसी और व्यापम को भी समय के साथ अपने सिस्टम को अपग्रेड करना चाहिए। इससे परीक्षाओं में होने वाले डमी कैंडिडेट, फर्जी आवेदन और अन्य तकनीकी गड़बडि़यों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि, तकनीक के साथ जमीनी स्तर पर मानवीय निगरानी भी उतनी ही जरूरी है, ताकि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण ईमानदार अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - कार्तिकेय पांडे, कोचिंग संचालक

तकनीकी अपग्रेडेशन अब विकल्प नहीं जरूरत

देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था यूपीएससी अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेशियल रिकग्निशन और एडवांस डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ा रही है। छत्तीसगढ़ की परीक्षाओं में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसा तकनीकी अपग्रेडेशन अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। हालांकि इसके लिए मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ, डेटा सुरक्षा और अतिरिक्त बजट जैसी चुनौतियां सामने आएंगी। इसके बावजूद युवाओं का भरोसा मजबूत करने के लिए सीजीपीएससी और व्यापम को इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। - कुणाल सिंह, कोचिंग मैनेजर

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