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करोड़ों का रेत घोटाला… जांच शुरू हुई तो फाइल सीईओ ऑफिस से गायब, अधिकारियों की मिलीभगत से रॉयल्टी चोरी

Sand Scam: खनिज विभाग में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से सिंडीकेट बनाकर करोड़ों का रेत घोटाला किया गया। मामले की जांच शुरू हुई तो सिंडीकेट से जुड़े लोगों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के ऑफिस से फाइल ही गायब कर दी।
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Chhattisgarh Sand Mining Rules 2026

रेत खदान: Chhattisgarh Sand Mining Rules (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Sand Scam: खनिज विभाग में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से सिंडीकेट बनाकर करोड़ों का रेत घोटाला किया गया। मामले की जांच शुरू हुई तो सिंडीकेट से जुड़े लोगों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के ऑफिस से फाइल ही गायब कर दी। अधिकारियों की फटकार के बाद मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। फाइल में घोटाले से संबंधित कई साक्ष्य थे। अब घोटाले को साबित करना मुश्किल होगा।

आरंग इलाके में वर्ष 2015-16 में रेत घाटों का ठेका दिया गया। इनका संचालन तत्कालीन आरंग जनपद पंचायत सीईओ सीपी मनहर, पंकज देव और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के तत्कालीन एसडीओ बीआर साहू की देखरेख में हुआ। उस दौरान रेत खनन करने वालों से रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपए लिए गए। रॉयल्टी वसूलने में बड़ा घोटाला सामने आया। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

2016 में आदेश, अब तक जांच पूरी नहीं

इस घोटाले में सीईओ मनहर, पंकज और बीआर साहू की भूमिका भी संदिग्ध थी। जांच के लिए मंत्रालय से विभागीय जांच के आदेश जारी हुए। इसके बाद रायपुर जिला पंचायत सीईओ व परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में जांच टीम बनाई गई। वर्ष 2016 से विभागीय जांच के आदेश हुए, लेकिन अब तक इसकी जांच पूरी नहीं हो पाई। जांच की फाइल रायपुर जिला पंचायत सीईओ कार्यालय में थी। सितंबर 2022 में अचानक फाइल गायब हो गई। अंतिम बार जांच फाइल सीईओ कार्यालय पहुंची थी। इसके बाद उसका पता नहीं चला।

अधिकारियों की मिलीभगत से रॉयल्टी चोरी

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2016 से पहले रेत खदानों का ठेका ग्राम पंचायत स्तर पर जनपद पंचायत, जिला पंचायत के पदाधिकारी और सीईओ तय करते थे। इसमें खनिज रॉयल्टी की चोरी अधिक होती थी। खनिज विभाग के अधिकारी भी इसे नहीं रोकते थे।

ठेकेदारों से लेकर जिला-जनपद पंचायतों के अधिकारी और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए की रॉयल्टी चोरी होती थी। हालांकि रॉयल्टी चोरी के मामले में रायपुर जिले में अब भी वैसी ही स्थिति है। कई ठेकेदारों से अब तक रॉयल्टी वसूला नहीं जा रही है।

एफआईआर हुई है, जांच कर रहे

सिविल लाइन थाना प्रभारी दीपक पासवान का कहना है कि जिला पंचायत के सीईओ कार्यालय से लेखापाल की ओर शिकायत की गई थी। इसमें रेत खनन की रॉयल्टी से जुड़े मामले की जांच फाइल कार्यालय से चोरी होने की शिकायत की गई है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच की जा रही है।