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एमपी में हैं श्री कृष्ण की 3 ससुराल, 27 दिनों तक चला था युद्ध, जामगढ़ गुफा बनी थी ससुराल

Krishna Janmashtami 2026: रायसेन के जामगढ़ को स्थानीय आस्था में श्रीकृष्ण की ससुराल माना जाता है, जहां उन्होंने जामवंत से 27 दिनों तक स्यमंतक मणि के लिए युद्ध किया था।
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Krishna Janmashtami (Photo Source: AI Image)

Krishna Janmashtami (Photo Source: AI Image)

Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी की रात जब मंदिरों में शंख-घंटों की गूंज के बीच कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा, तब रायसेन जिले की धरती भी श्रीकृष्ण से जुड़े अपने एक अनूठे रिश्ते को याद करेगी। यह रिश्ता केवल भक्ति का नहीं, बल्कि युद्ध, पहचान और विवाह की उस पौराणिक गाथा का है, जिसमें द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने 27 दिनों तक एक महायोद्धा से युद्ध किया और अंत में उसी योद्धा की पुत्री उनके जीवन की आठ प्रमुख पटरानियों में शामिल हुई। स्थानीय लोक आस्था के अनुसार बरेली क्षेत्र का जामगढ़ और यहां स्थित जामवंत की गुफा इसी रोमांचक प्रसंग के साक्षी है।

श्रीकृष्ण पर लगा था आरोप

रायसेन जिले का जामगढ़ भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच हुए स्यमंतक मणि युद्ध की स्थानीय मान्यता के कारण विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भागवत परंपरा में वर्णित कथा के अनुसार स्यमंतक मणि को लेकर श्रीकृष्ण पर आरोप लगा था। अपने ऊपर लगे आरोप को दूर करने के लिए श्रीकृष्ण स्वयं मणि की खोज में निकले और उस स्थान तक पहुंचे, जहां जामवंत निवास करते थे। स्यमंतक मणि जामवंत के पास थी। मणि प्राप्त करने के लिए श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच भीषण युद्ध हुआ, जो लगातार 27 दिनों तक चलता रहा। दोनों ही महान योद्धाओं ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी। युद्ध केवल केवल बल का का संघर्ष नहीं था, बल्कि दो युगों को जोड़ने वाली एक अद्भुत पौराणिक घटना बन गया।

श्रीकृष्ण को सौंप दी स्यमंतक मणि

समय बीतने के साथ जामवंत को अनुभव हुआ कि उनके सामने कोई साधारण योद्धा नहीं है। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम के सहयोगी रहे जामवंत ने श्रीकृष्ण में अपने उसी आराध्य का स्वरूप पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने युद्ध समाप्त कर दिया। जामवंत ने श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे कर दिया। इसी प्रसंग के कारण स्थानीय आस्था में जामगढ़ को भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में भी देखा जाता है। जाम्बवती श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पटरानियों में शामिल मानी जाती हैं। सदियों से चली आ रही यह लोकमान्यता जामगढ़ को रायसेन जिले के महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में अलग पहचान देती है।

प्रदेश में श्री कृष्ण की तीन ससुराल

भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा में से तीन महारानियों माता रुक्मिणी, माता जाम्बवती और माता मित्रविंदा का सीधा संबंध मध्य प्रदेश से है।

रायसेन, जामगढ़ गुफा: जामवंत ने श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे कर दिया। इसी प्रसंग के कारण जामगढ़ को भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल माना जाता है।

धार जिले का अमझेराः स्थानीय परंपराओं में माता रुक्मिणी के हरण की कथा से जुड़ा माना जाता है। रुक्मिणी श्रीकृष्ण को अपना पति मानती थीं, लेकिन उनके भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे।रुक्मिणी के संदेश पर श्रीकृष्ण पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए। इस कथा को अमझेरा और आसपास की लोकपरंपराओं से जोड़कर देखा जाता है।

उज्जैन की प्राचीन अवंतिकाः अवंतिका, श्रीकृष्ण की पत्नी मित्रविंदा से जोड़ने की परंपरा भी प्रचलित है। मित्रविंदा के स्वयंवर में श्रीकृष्ण द्वारा उन्हें अपने साथ ले जाने की कथा पौराणिक परंपरा में मिलती है। उज्जैन से उनका संबंध प्राचीन अवंति और स्थानीय मान्यताओं से जोड़ा जाता है।