
Rare Butterflies In Ratapani Sanctuary
औबेदुल्लागंज. रातापानी अभयारण्य में केवल टाइगर ही नहीं, रंग—बिरंगी तितलियां भी हैं. इनमें कई दुर्लभ तितलियां भी शामिल हैं. अभ्यारण्य में तितलियों का सर्वे किया जा रहा है. शनिवार सुबह शुरु हुए इस सर्वे में 55 प्रजातियों की तितलियां मिलीं जिन्हें सर्वे टीम ने सूचीबद्ध किया है। वन मंडल अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि रातापानी अभयारण्य की 34 टीमों ने सुबह और शाम में लगभग 60 ट्रेल्स पर सर्वेक्षण किया।
सर्वे में टीम को जंगल में जो तितलियां मिलीं उनमें कोमन ग्रास येलो, क्रिसमन रोज, कोमन जेजेबल, प्लेन टाईगर, बेरोनेट, चौकलेट पेन्सी, ब्लू पेन्सी, ग्रेट एगफ्लाई आदि प्रमुख हैं। वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियां जैसे-कोमन पाइस्ट, ग्राम ब्लू, कोमन गल, डेनेट एगफ्लाई आदि भी यहां पाई गई हैं।
सर्वे में वन विभाग से तितली विशेषज्ञ रिटायर्ड प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एनएस डुंगरियाल, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के रमन तथा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन ने भी भाग लिया। गौरतलब है कि रातापानी अभयारण्य में 13 राज्यों से आए 88 विशेषज्ञ तितलियों का सर्वे कर रहे हैं। सर्वे दल के फोटोग्राफर ने तितलियों को अपने कैमरों में भी कैद किया।
वनमंडलाधिकारी विजय कुमार ने बताया कि तितलियां खेतों में फसलों पर बैठती हैं तो परांगण करती हैं, जिससे फसलों में भी प्रजनन की तरह क्रिया होती है और फसलों में बीज बनते हैं। यह पेड़ों पर बैठकर परांगण करती हैं, पौधों के प्रजनन के लिए भी तितलियां आवश्यक हैं। कई तितलियों के लार्वा को पक्षी खाते हैं, तितलियां नहीं होंगी, तो पेड़-पौधे नष्ट हो जाएंगे।
कई तितलियों के लार्वा कीटनाशक जैसे होते हैं, इस कीटनाशक को फसलों के कीड़े खा जाते हैं जिससे फसलें सुरक्षित रहती हैं। यहां शुद्ध पर्यावरण होता है वहीं तितलियां वहीं देखने को मिलती हैं। विजय कुमार का कहना है कि यह दिखने में छोटी जरूरी है लेकिन इनका पर्यावरण में महत्वपूर्ण स्थान है। इनका संरक्षण उतना ही जरूरी है, जितना टाइगर का। विजय कुमार ने कहा, इन्हें संरक्षित कर हम अपने आप को ही बचा रहे हैं।
Published on:
12 Sept 2021 12:14 pm
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