
रायसेन जिले का चुनाव।
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जिले की दो विधानसभाओं सिलवानी और उदयपुरा के प्रत्याशियों के नाम शामिल किए हैं। कोई नया प्रयोग नहीं करते हुए पार्टी ने पुराने प्रत्याशियों पर ही फिर दांव लगाया है। जिनमें से एक वर्तमान विधायक हैं, जबकि दूसरे पिछले दो चुनावो में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे हैं, जबकि उससे पहले वे भाजश से विधायक रहे थे। कांग्रेस की सूची जारी होते ही जिले की चार में से दो विधानसभाओं में मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। सिलवानी में जहां पिछले तीन चुनावों में प्रतिद्वंदी रहे चेहरों में फिर मुकाबला होगा, तो उदयपुरा में एक युवा और नए चेहरे का अनुभवी प्रतिद्वंदी से मुकाबला होगा। राजनीतिक गलियारों में इन मुकाबलों को खासा दिलचस्प होना बताया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस से इन्ही नामों पर मुहर लगने की पूरी संभावना थी। जिसे भांपते हुए भाजपा ने और इन प्रत्याशियों ने भी बहुत पहले से अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया था।
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हमेशा रहा है कांटे का मुकाबला
2008 में गठन के बाद से सिलवानी विधानसभा में भाजपा से रामपाल सिंह राजपूत ही प्रत्याशी रहे हैं। वहीं पहले भाजश और फिर कांग्रेस से देवेंद्र पटेल ने उनका मुकाबला किया है। दोनों के बीच इससे पहले हुए तीन चुनावों में कांटे का मुकाबला हुआ है। जिनमे एक बार देवेंद्र पटेल तो दो बार रामपालसिंह ने मैदान मारा। मुकाबला इस बार भी कांटे का ही और दिलचस्प होगा, ऐसा राजनीतिक जानकार बताते हैं।
यहां प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी मतदाताओं को साधने की है। चुनाव में प्रचार की शुरुआत भले ही विकास के मुद्दों, समस्याओं और उनको हल करने के वादों के साथ हो, लेकिन अंतिम समय में सामाजिक प्रबंधन पर पहुंचना तय है, इसे जो बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएगा वही सिरमौर बनेगा।
यहां कांग्रेस को नहीं मिली लगातार जीत
उदयपुरा विधानसभा के मतदाताओं ने कांग्रेस को लगातार जीत का स्वाद नहीं चखाया है। भाजपा के रामपाल सिंह तो यहां से लगातार चार चुनाव जीते, लेकिन कांग्रेस शुरुआत से ही लगातार दो चुनाव नहीं जीत सकी। विधानसभा के पुनर्गइन के बाद से यहां भी जातिगत समीकरण ही चुनाव की जीत हार का आधार बनने लगे हैं। शुरुआत यहां भी विकास के मुद्दों और समस्याओं से होती है, लेकिन अंत में कमरा बंद बैठकों में होने वाले सामाजिक निर्णय ही जीत और हार का आधार बनते रहे हैं। किरार, पुरिवया, ठाकुर, ब्राम्हण, रघुवंशी, मुस्लिम समाजों की प्रमुखता वाली इस विधानसभा में भी मुकाबला दिचस्प होगा। भाजपा ने युवा और नए चेहरे पर दांव लगाया है, जबकि कांग्रेस ने वर्तमान विधायक में ही भरोसा दिखया है। भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र पटेल किरार समाज से हैं तो कांग्रेस के देवेंद्र पटेल गडरवास पुरविया समाज से आते हैं। दोनो ही समाजों का इस विधानसभा में खासा वोट बैंक है।
सिलवानी में ये रहे हैं पिछले परिणाम
वर्ष विजयी प्रतिद्वंदी
2008 देवेंद्र पटेल (भाजश) रामपाल सिंह (भाजपा)
2013 रामपाल सिंह (भाजपा) देवेंद्र पटेल (कांग्रेस)
2018 रामपाल सिंह (भाजपा) देवेंद्र पटेल (कांग्रेस)
उदयपुरा में ऐसे रहे परिणाम
वर्ष विजयी प्रतिद्वंदी
1972 गौतम शर्मा (कांग्रेस) प्रहलाद सिंह (जनसंघ)
1977 गोवर्धन सिंह (भाजपा) गौतम शर्मा (कांग्रेस)
1980 दिलीप सिंह (भाजपा) मो. हनीफ (कांग्रेस)
1985 विमला शर्मा (कांग्रेस) कमल सिंह लोधी (भाजपा)
1990 रामपाल सिंह (भाजपा) हाकिम सिंह रघुवंशी (कांग्रेस)
1993 रामपाल सिंह (भाजपा) राम प्रसाद (कांग्रेस)
1998 रामपाल सिंह (भाजपा) कमल सिंह (कांग्रेस)
2003 रामपाल सिंह (भाजपा) प्रताप भानु शर्मा (कांग्रेस)
2008 भगवान सिंह राजपूत (कांग्रेस) भगवत सिंह पटेल (भाजपा)
2013 रामकिसन पटेल (भाजपा) भगवान सिंह राजपूत (कांग्रेस)
2018 देवेंद्र पटेल गडरवास (कांग्रेस) रामकिसन पटेल (भाजपा)
Updated on:
16 Oct 2023 08:26 am
Published on:
16 Oct 2023 08:23 am
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