
Sonography only by a medical officer
रायसेन. जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा मरीजों के लिए मुसीबत साबित हो रही है। जिलेभर से आने वाली गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी कराना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
आज जांच कराने पर सोनोग्राफी के लिए दस दिन बाद का नंबर दिया जा रहा है। ऐसे में उनकी समस्या का समय पर पता चलना और उसका तुरंत इलाज होना मुश्किल हो रहा है। जो सक्षम हैं, वे प्राइवेट सेंटर पर फीस देकर सोनोग्राफी कराती हैं, लेकिन गरीब महिलाओं को नंबर का इंतजार करना पड़ता है।
जिला अस्पताल में वर्तमान में प्रतिदिन 50 से 60 गर्भवती महिलाओं के पंजीयन सोनोग्राफी के लिए हो रहे हैं। जबकि 20 से 25 की सोनोग्राफी हो रही है। ऐसे में दस दिन बाद भी सोनोग्राफी हो जाए, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।
दो बार आई पर नहीं हो सकी सोनोग्राफी
ग्राम गुदावल से आईं गर्भवती वर्षा पूर्वी का कहना है कि वह दो बार सोनोग्राफी कराने आ चुकी हैं, लेकिन लंबी वेटिंग की वजह से उनकी जांच नहीं हो सकी है। प्रसूता सीमा धाकड़ को सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा, उसके बाद भी निराश मिली।
वहीं मोहम्मदन बी, फैजा मेवाती, सलमा खान, जैतून बी भी सोनोग्राफी के लिए चक्कर लगा रही हैं। जिले में सोनोग्राफी की सुविधा रायसेन के अलावा केवल मंडीदीपतह चले जाते हैं, लेकन बाकी नौ तहसीलों की प्रसूताओं को रायसेन आना पड़ता है।
ये है समस्या की जड़
सोनोग्राफी के लिए एक्सपर्ट रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। यहां पदस्थ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एसएस कुशवाह ने छह माह पहले वीआरएस ले लिया, तब से किसी ओर की नियुक्ति नहीं हुई है। सोनोग्राफी का भार एक ही मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक कुमार गुप्ता पर है।
सहयोगी डॉ. जिंसी ठाकुर पांच माह से अवकाश पर हैं। यह काम डॉ. रजनीश सिंघई भी संभाल सकते हैं, लेकिन आपसी खींचतान में उन्हेें जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है, जिसके लिए कलेक्टर, सीएमएचओ ने भी अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए थे।
जल्द ही सोनोग्राफी सेंटर में डॉक्टरों की नई पदस्थापना कर व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाएगा, ताकि गर्भवती महिलाओं की व अन्य मरीजों की परेशानी काफी हद तक कम की जा सके।
- डॉ. बीबी गुप्ता, सिविल सर्जन अस्पताल
Published on:
10 Aug 2018 12:43 pm
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