
अनोखा विरोध : लोन अटका तो उपभोक्ताओं ने बैंकों के गेट पर पटक दिया कचरा, शुरु हुआ निराकरण
रायसेन/ बैंकों में किसी न किसी तरह की अनुविधा का सामना अकसर लोगों ने किया होगा। खासकर उस समय जब मामला लोन का हो। कई बार डॉक्युमेंटेशन की कमी के चलते लोन के प्रकरण अटक जाते हैं। लेकिन, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज स्थित एक बैंक लोन का प्रकरण अटकने पर उपभोक्ताओं ने अनोखा विरोध किया। इसका नतीजा ये हुआ कि, बैंक प्रबंधन ने सारे काम छोड़कर अटके हुए प्रकरण को निपटाने में ही भलाई समझी।
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कचरे से मची अफरा तफरी
दरअसल, हुआ ये कि, सोमवार की सुबह नगर पालिका की कचरा गाड़ियों ने शहर की चार बैंकों के मुख्य द्वार के सामने कचरा पटक दिया। बैंकों के द्वार पर कचरा पड़ा होने से बैंक कर्मियों का बदबू से बुरा हाल हो गया। स्थिति ये बन गई कि, बैंकों को अपने मुख्य द्वार ही बंद करने पड़े। इससे अफरा तफरी और बढ़ गई। बैंक के अन्य ग्राहक बाहर खड़े होकर बैंक खुलने का इंतजार करते रहे। जब बैंककर्मी पहुंचे, तो कुछ देर तक उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया। अधिकारी और कर्मचारी फोन पर शिकायत करते नजर आए। इतना ही नहीं बैंक प्रबंधकों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी अवगत कराया। करीब एक घंटे तक चले इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद नगर पालिका के सफाई कर्मी बैंकों के सामने डला कचरा उठाकर ले गए। लेकिन, इसका परिणाम ये हुआ कि, मंगलवार की सुबह से ही शहर के चारों बैंकों में मुस्तैदी से प्रकरणों का निराकरण किया गया।
शुरु हुआ प्रकरणों का निराकरण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शासन की स्टेट वेंडर योजना के तहत गरीबों को दस-दस हजार रुपए के लोन प्रकरण स्वीकृत करने का लक्ष्य बैंक एसबीआई शाखा बेगमगंज, सेंट्रल बैंक, सेंट्रल ग्रामीण बैंक और आईसीआईसी बैंक को दिया था, लेकिन बैंकों की उदासीनता के चलते ये लोन प्रकरण अटके हुए थे। जब नगर पालिका के कर्मचारी फॉर्म लेकर जाते, तो वहां पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता। इस बात से नाराज सफाई कर्मचारियों ने कचरा ले जाकर बैंकों के सामने पटक दिया। मंगलवार को बैंक अधिकारियों ने प्रकरणों का निराकरण करना शुरू कर दिया।
अधिकारियों ने दी सफाई
इस मामले में नगर पालिका के प्रशासक एवं एसडीएम अभिषेक चौरसिया ने बताया कि, मामले की जांच करवाते हैं। सीएमओ ही बता पाएंगे कि मामला क्या है, जांच उपरांत कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक प्रताप सिंह के मुताबिक, नगर पालिका परिषद द्वारा पूर्व में 350 प्रकरण का लक्ष्य दिया गया था। इनमें 333 स्वीकृत कर पथ विक्रेताओं को राशि वितरण की गई थी। पुनः दिसंबर 2020 में 350 प्रकरणों का लक्ष्य दिया गया, जिसमें से शाखा में सिर्फ 40 आवेदक आए थे। सभी खानापूर्ति के बाद 27 आवेदकों को ऋण वितरण किया गया है। शेष मामलों की प्रक्रिया भी जारी है।
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Published on:
02 Feb 2021 04:57 pm
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