
Snake bite: बच्ची को सांप ने काटा (Photo Source - Patrika)
Rajgarh news: घर के आंगन में रोज खेलने वाली कृतिका की आवाज अब कभी नहीं आएगी। मासूम सी बच्ची की मौत के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। सब यही बोल रहे कि अब नई फ्रॉक कौन पहनेगा। मम्मी-पापा का रो-रोकर बुरा हाल है। इलाज में देरी न होती तो कृतिका हम सबके साथ होती। बता दें कि एमपी के राजगढ़ जिले में घर के आंगन में बच्चों के साथ खेल रही तीन साल की मासूम कृतिका उर्फ दिव्या का सांप ने डस लिया। आंगन में खेलते समय काले रंग के सांप ने उंगली में काटा था।
कृतिका के पिता रमेश गुर्जर निवासी जोगीपुरा ने बताया कि सांप ने दाएं हाथ की उंगली में डंस लिया। इसके बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और देव स्थान पर ले गए। करीब दो घंटे बाद जब बच्ची को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक जहर शरीर में फैलना शुरू हो चुका था।
डॉक्टरों की टीम ने रातभर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन अलसुबह करीब 6.31 बजे मासूम ने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार कृतिका घर के आंगन में अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान अचानक सांप ने उसके दाएं हाथ की उंगली में काट लिया। सांप के काटने के बाद परिजन उसे लेकर पहले झाड़-फूंक कराने और देव स्थान पर चले गए। करीब दो घंटे बाद रात लगभग 11 बजे उसे जिला अस्पताल लाया गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बच्ची का उपचार शुरू किया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। शुरुआत में तबीयत बिगड़ी, लेकिन उपचार के दौरान कुछ समय के लिए स्थिति में सुधार भी हुआ। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद दांगी की टीम ने रातभर उपचार के प्रयास किए। सुबह अचानक उसकी तबीयत फिर बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद दांगी ने बताया कि बच्ची को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया। स्थिति बिगड़ने पर सीपीआर भी दिया गया, लेकिन तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। ऐसी स्थिति में मरीज को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय नहीं गंवाना चाहिए। मरीज को सीधे अस्पताल ले जाना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने पर एंटी-स्नेक वेनम सहित जरूरी उपचार शुरू किया जा सकता है।
-तुरंत अस्पताल ले जाएं: सांप के काटने को मेडिकल इमरजेंसी मानें। एंबुलेंस या उपलब्ध वाहन से बिना देरी अस्पताल पहुंचाएं।
-झाड़-फूंक में समय न गंवाएं: देव स्थान, झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के चक्कर में बिताया गया समय मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है।
-घाव को न काटें, न चूसें: काटे हुए स्थान पर चीरा लगाना या मुंह से जहर चूसने की कोशिश नुकसान पहुंचा सकती है।
-कसकर रस्सी न बांधें: हाथ-पैर को बहुत कसकर बांधने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है।
-मरीज को शांत रखें: उसे अनावश्यक चलने-फिरने से रोकें और काटे गए अंग को स्थिर रखने की कोशिश करें।
Updated on:
14 Aug 2026 12:21 pm
Published on:
14 Aug 2026 12:21 pm
