
Scam in the municipality: लोकायुक्त ने खोली भ्रष्टाचार की परतें (Photo Source - Patrika)
Alleged corruption: एमपी के ब्यावरा में स्थानीय नगर पालिका में भवन अनुज्ञा के नाम पर चला कथित भ्रष्टाचार अब बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। भोपाल पुलिस स्थापना लोकायुक्त की जांच में तात्कालीन सीएमओ इकरार अहमद, संविदा उपयंत्री राजेश दांगी और निजी आर्किटेक्ट कंसल्टेंट केके शर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
जांच के मुताबिक यह केवल नियमों की अनदेखी का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की साजिश थी। जिसमें तात्कालीन सीएमओ इकरार अहमद और उपयंत्री दांगी सहित कंसल्टेंट पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
दरअसल लोकायुक्त को मिली शिकायत में आरोप था कि वर्ष 2018-19 से 2020 के बीच भवन निर्माण अनुमति जारी करते समय कर्मकार उपकर और वाटर हार्वेस्टिंग शुल्क की नियमानुसार वसूली नहीं की गई। जिसकी जांच में सामने आया कि निर्माण लागत का वास्तविक आंकलन जानबूझकर कम दिखाया गया ताकि भवन मालिकों से देय शुल्क वसूला ही न जाए। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि उपयंत्री राजेश दांगी ने सरकारी पद पर रहते हुए निजी कंसल्टेंट के रूप में फर्जी आईडी बनाकर आवेदन प्रक्रिया को प्रभावित किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन्हीं आवेदनों को सीएमओ कार्यालय से तेजी से मंजूरी मिलती रही। लोकायुक्त ने मामले में सीएमओ, उपयंत्री सहित तीन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कराया है।
भवन निर्माण की वास्तविक लागत छिपाकर अधिकांश मामलों में 9,88,200 का एक जैसा एस्टीमेट लगाया गया। यह राशि यूं ही नहीं चुनी गई थी, क्योंकि 10 लाख पार करते ही 1 प्रतिशत कर्मकार उपकर देना अनिवार्य हो जाता है। यहीं से कथित भ्रष्टाचार का असली चेहरा सामने आता है। जांच में सामने आया कि इंजीनियर लागत कम दर्शाता था और सीएमओ उस पर आंख बंद कर मंजूरी देते रहे। इस तालमेल ने उपकर और वाटर हार्वेस्टिंग शुल्क दोनों की वसूली रोक दी। 140 वर्गमीटर से बड़े भवनों पर जहां वाटर हार्वेस्टिंग शुल्क लेना जरूरी था, वहां भी नियमों को दरकिनार किया गया।
दरअसल पक्के भवन निर्माणों के लिए भवन अनुज्ञा दिए जाने में प्रति वर्ग मीटर से आंकलन किया जाता है। जिसमें प्रति वर्ग मीटर करीब 9500 रुपए की राशि जमा करना होती है। लेकिन जिम्मेदारों ने इसका उपयोग ही नहीं किया, इसकी बजाए प्रायवेट कंस्लटेंट केके शर्मा द्वारा प्रस्तावित असत्य एस्टीमेट को ही स्वीकार करते हुए अनुज्ञा जारी कर दी गई। जिससे शासन को काफी नुकसान हुआ।
Updated on:
5 Jul 2026, 3:22 PM IST
Published on:
5 Jul 2026, 3:22 PM IST
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