
Rajgarh Farmers Bhopal March- न्याय की मांग लेकर सीएम से मिलने भोपाल निकले राजगढ़ के किसान (फोटो सोर्स- Patrika)
(रिपोर्ट- राजेश विश्वकर्मा, राजगढ़)
Farmers land dispute- चिलचिलाती धूप, तपती सड़क और नंगे पैर न्याय की तलाश में बढ़ते कदम। राजगढ़ में सोमवार दोपहर जीरापुर के व्यस्त इंदर चौराहे पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राहगीरों को ठहरने पर मजबूर कर दिया। हाथ में पीतल की घंटी और आंखों में उम्मीद लिए दो किसान भाई जीरापुर से भोपाल की ओर पैदल यात्रा (Rajgarh Farmers Bhopal March) पर निकल पड़े हैं। एक अलग तरह का विरोध और संकल्प देखने को मिला। उनका कहना है कि अदालत से न्याय मिलने के बावजूद उन्हें अपनी जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया, इसलिए अब मुख्यमंत्री से सीधे गुहार लगाने का निर्णय लिया है।
माचलपुर थाना क्षेत्र के खेड़ी पटेल गांव निवासी देवीसिंह गुर्जर और उनके भाई अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए करीब 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि पोलखेड़ा गांव के कुछ प्रभावशाली लोग उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करना चाहते हैं। मामले में उन्होंने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः अदालत ने उनके पक्ष में फैसला भी सुनाया। जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज उनके नाम पर हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। देवी सिंह ने बताया कि न्यायालय का आदेश मिलने के बाद वे कार्रवाई की उम्मीद लेकर तहसीलदार, पुलिस थाना, एसडीएम कार्यालय और जिला कलेक्टर तक पहुंचे, लेकिन हर जगह केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर आदेश के पालन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण वे आज भी अपनी ही जमीन के अधिकार से वंचित हैं।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। यदि जमीन पर कब्जा नहीं मिला तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी मजबूरी में उन्होंने भोपाल जाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी पीड़ा रखने का फैसला किया है। यात्रा के दौरान हाथ में बज रही घंटी को वे ‘इंसाफ की घंटी’ बता रहे हैं, जिसके जरिए वे शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं।देवीसिंह ने कहा कि अदालत का फैसला उनके पक्ष में आने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन उन्हें न्याय दिलाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब मुख्यमंत्री ही उनकी अंतिम उम्मीद हैं। उनका कहना है कि यदि शासन स्तर पर भी सुनवाई नहीं हुई तो उनका परिवार गंभीर संकट में पड़ जाएगा।
यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। जब किसी पीड़ित के पक्ष में न्यायालय निर्णय दे चुका हो, तो उसके क्रियान्वयन के लिए उसे सड़कों पर उतरकर संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? फिलहाल, न्याय की उम्मीद में दोनों किसान भाई भोपाल की ओर बढ़ रहे हैं और क्षेत्र के लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी ‘इंसाफ की घंटी’ की गूंज आखिरकार वल्लभ भवन तक पहुंचती है या नहीं?
Updated on:
22 Jun 2026, 9:46 PM IST
Published on:
22 Jun 2026, 9:46 PM IST
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