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‘सीएम आए तो पहले मेरा इस्तीफा लें’, MP के राज्यमंत्री का बड़ा ऐलान, रोकी कार्रवाई

MP News: किसान महापंचायत में पहुंचे राज्यमंत्री ने कहा कि-पहले किसानों की जमीनों का सीमांकन कर उन्हें चिन्हित कराए उसके बाद ही कंपनी को जमीन पर कब्जा दिलाया जाए।

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When CM comes first accept my resignation Minister of State makes major announcement MP News

Minister of State Narayan Singh Panwar in Kisan Mahapanchayat (फोटो- नारायणसिंह पंवार सोशल मीडिया)

(रिपोर्ट- वीरेंद्र जोशी, ब्यावरा)

MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ में किसानों ने एक बड़ी कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ब्यावरा क्षेत्र के एबी रोड पर बांकपुरा में स्थित पट्टे की जमीन पर जबरन बायो एनर्जी कंपनी (दिलीप बिल्डकॉन) को कब्जा दिलाने के विरोध में बुधवार को किसानों ने महापंचायत बुलाई। इस महापंचायत में पहुंचे ब्यावरा विधायक व राज्यमंत्री नारायणसिंह पंवार (Minister of State Narayan Singh Panwar) शामिल हुए। उन्होंने इसपर किसानों का समर्थन किया।

पहले मेरा इस्तीफा ले, फिर जमीन दें- राज्यमंत्री

मंत्री पंवार ने कलेक्टर से फोन और एसडीएम से मौके पर दो टूक कहा कि पहले किसानों की जमीनों का सीमांकन कर उन्हें चिन्हित कराए उसके बाद ही कंपनी को जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। तब तक कंपनी की जमीन का सिर्फ सीमांकन किया जाए। इस दौरान राज्यमंत्री पंवार ने यहां तक कह दिया कि 'बगैर सीमांकन के किसानों की जमीनें नहीं दी जाए, चाहे कितना ही बड़ा उद्योगपति आ जाए या मुख्यमंत्री, यदि किसी को जमीन ही दी जाए तो पहले मेरा इस्तीफा लिया जाए फिर किसानों की जमीन।'

किसान बोले- एक इंच जमीन नहीं देंगे

मंत्री के बाद महापंचायत जिपं अध्यक्ष चंदर सिंह सौंधिया की मौजूदगी में आसपास के प्रभावित किसानों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि बांकपुरा सहित आसपास के गांवों की एक इंच जमीन भी कंपनी को नहीं दी जाएगी। यह जमीन हमारे किसानों की अस्मिता, आजीविका और आने वाली पीढिय़ों का अधिकार है। किसान अपनी जमीन बचाने के लिए पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ खड़ा है। गांव की जमीन गांव में रहेगी और किसान की जमीन किसान के पास ही रहेगी।

जनआंदोलन की दी चेतावनी

इस दौरान किसानों ने शासन एवं प्रशासन से कहाकि, निजी कंपनियों के हित में किसानों पर किसी प्रकार का दबाव, भय या उत्पीडऩ न किया जाए। किसानों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार, प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसानों की आवाज को अनसुना किया गया तो पूरे क्षेत्र का किसान लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा जनआंदोलन खड़ा करने के लिए बाध्य होगा।

यह है पूरा मामला

दरअसल साल 1998-99 में दिग्विजयसिंह सरकार के शासनकाल में बांकपुरा में हाइवे पर स्थित जमीन पर आसपास के किसानों को सरकार ने जमीनों के पट्टे दिए थे। इस पट्टे की जमीन पर बांकपुरा, लालपुरिया, फूंकनी, सेमली सहित आसपास के करीब 8 से 9 गांवों के किसान खेती करते आ रहे हैं। बाद में विक्रय निषेध उक्त जमीनों को पट्टाधारकों से कंपनी ने खरीदकर कलेक्टर ने विक्रय अनुमति लेकर अपने नाम करा लिया है। अब उक्त जमीन की नापजोख कराकर प्रशासन किसानों को बेदखल कर कंपनी को कब्जा दिला रहा है। किसानों का आरोप है कि, कंपनी की सिर्फ 219 बीघा जमीन है। जबकि प्रशासन कंपनी से मिलकर 400 बीघा से ज्यादा जमीन पर कंपनी को जबरन कब्जे दिला रहा है। इसी के विरोध में बांकपुरा क्षेत्र के किसान लगातार प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं।

कंपनी ने विधिवत अपने नाम कराई जमीन- एसडीएम

बायो एनर्जी कंपनी (दिलीप बिल्डकॉन) की जमीन से लगी हुई कुछ किसानों की निजी जमीन भी आ रही है, उन्हें संदेह है कि, कंपनी उनकी जमीन पर भी कब्जा कर रही है। मंत्रीजी ने कहा है कि, पहले किसानों की जमीन चिन्हित कर सीमा तय की जाए, फिर कंपनी की जमीन नाप कर उसे कब्जा दिलाया जाए। कंपनी ने पट्टे की जमीन के विक्रय की अनुमति लेकर विधिवत अपने नाम कराई है। - गोविंद कुमार दुबे, एसडीएम ब्यावरा

कंपनी ने दी सफाई

हमारी कंपनी ने विक्रय की अनुमति लेकर ही जमीन की रजिस्ट्री कराई है। कंपनी ने जमीन की कीमत दी है, हम प्रशासन से सीमांकन कराकर कब्जा मांग रहे हैं। ग्रामीण इसे अपनी बताकर विरोध कर रहे हैं। - अशोक तोमर, मैनेजर दिलीप बिल्डकॉन