
मुकेश साहू। राजनांदगांव संसदीय इतिहास में एकमात्र महिला सांसद के तौर पर खैरागढ़ रियासत की बहू स्व. पद्मावती देवी के नाम लिया जाता है। उन्होंने 1967 में चौथी लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। वह खैरागढ़ रियासत की रानी थीं। खैरागढ़ में स्थापित एशिया का एक मात्र इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय भी इन्हीं की देन है। रानी ने संगीत विश्वविद्यालय के लिए अपना महल तक राज्य सरकार को दान में दे दिया। उनके बाद राजनांदगांव संसदीय सीट से लोकसभा में आज तक किसी भी महिला को प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला।
जानकार बताते हैं कि रानी ने साल 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। इस चुनाव में उन्हें 1 लाख 32 हजार 444 वोट मिले थे। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी भाकपा के पी. राय को मात्र 46004 वोट मिले थे। उस दौर में रानी पद्मावती ने अपने विरोधी को एकतरफा मुकाबले में 86 हजार 440 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।
एकमात्र महिला सांसद रहते पद्मावती देवी ने कई उल्लेखनीय कार्य किए। खास तौर पर शिक्षा और संगीत के क्षेत्र में उनका गहरा लगाव रहा। उन्होंने खैरागढ़ में एशिया के पहले संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राज्य सरकार को अपना महल कमल विलास दान में दे दिया था। इस दौरान मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल के सहयोग से अपनी बेटी राजकुमारी इंदिरा के नाम पर संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 4 अक्टूबर 1956 को संगीत विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया था।
रानी पद्मावती ने महिला व बालिकाओं को पढ़ाने के लिए राजभवन में पद्मावती पुस्तकालय की स्थापना कराई थी। खैरागढ़ का राजा लाल बहादुर क्लब सप्ताह में एक दिन महिलाओं के लिए आरक्षित था। क्लब में उनके लिए बैडमिंटन, कैरम, सिलाई-बुनाई और संगीत के लिए व्यवस्था रहती थी। उन्होंने लड़कियों को घुड़सवारी व बंदूक चलाने का भी प्रशिक्षण दिलाया। वहीं गरीब परिवार के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का इंतजाम कराया। पद्मावती देवी के शिक्षा व गरीबों के कल्याण के लिए किए कार्यों को आज भी क्षेत्र के लोग याद करते हैं।
पद्मावती देवी का जन्म 1918 में उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ। वे प्रतापगढ़ के राजा प्रताप बहादुर सिंह की छोटी बेटी थीं। उनकी शिक्षा घर में ही हुई थी। 16 साल की उम्र में उनका विवाह खैरागढ़ के राजा बीरेन्द्र बहादुर के साथ हुआ। खैरागढ़ रियासत की सदस्य बनने के बाद से वह जनहित को लेकर हमेशा सक्रिय रहीं। उनका निधन 12 अप्रैल 1987 को हुआ।
पद्मावती देवी को देश के प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल ने 1948 में राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया। वे 1952 से 1967 तक विधायक रहीं। उन्हें मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इस दौरान 1967 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर वह सांसद बनीं। सन 1971 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया। इस दौरान पद्मावती देवी ने एनसीओ के टिकट पर चुनाव लड़ा पर हार गईं। इसके बाद से राजनांदगांव लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने किसी महिला को टिकट नहीं दिया है।
Updated on:
07 Apr 2024 12:01 pm
Published on:
06 Apr 2024 05:43 pm
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