18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ को मिली देशी कपूरी पान की नई पहचान, खेती कर किसान बंटूराम को हो रहा भारी मुनाफा…जानिए इनकी कहानी

Rajnandgaon News: छत्तीसगढ़ में पान की खेती के लिए प्रसिद्ध राजनांदगांव जिले के छुईखदान में देशी कपूरी पान को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने एक नई पहचान दिलाई है।

2 min read
Google source verification
rajnandgaon_news.jpg

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में पान की खेती के लिए प्रसिद्ध राजनांदगांव जिले के छुईखदान में देशी कपूरी पान को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने एक नई पहचान दिलाई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में पान की खेती करने वाले छुईखदान के ग्राम धारा के किसान बन्टू राम महोबिया को पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा कृषक किस्म छुईखदान देशी कपूरी पान के नाम से पंजीकृत कर नौ वर्षों तक इस किस्म के उत्पादन, विक्रय, विपणन, वितरण, आयात एवं निर्यात करने का एकाधिकार दिया गया है।

इस प्रमाणपत्र के माध्यम से भारत सरकार महोबिया को भारत में कहीं भी अपनी पंजीकृत किस्म का विपणन करने का विशेष लाइसेंस प्रदान किया गया है। बन्टू राम महोबिया छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले के ग्राम धारा के निवासी है। कई दशकों से ये परंपरागत तरीके से देशी कपूरी पान की खेती करते आ रहे हैं। इस पान का परीक्षण कलकत्ता और बैगलोर में स्थित सेेंटर में किया गया है। भारत में पंजीकृत यह पहली पान की किस्म है।

यह भी पढ़े: PM मोदी पर फूटा शंकराचार्य का गुस्सा, बोले- राम मंदिर में मूर्ति स्थापना की तो क्या हम सिर्फ तालियां बजाते इसलिए हम....मचा बवाल

छत्तीसगढ़ में कपूरी पान का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। वर्षों से यह पान डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी माता को अर्पित किया गया है। सांस्कृतिक महत्व के अलावा कपूरी पान के अन्य कई लाभ भी हैं। अनुसंधान के अनुसार, यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है और पाचन संबंधी समस्याओं में भी मददगार साबित होता है। साथ ही, यह अनेक गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद करता है। कपूरी पान का सेवन गर्मियों में किया जाता है जिससे शरीर में शीतलता की अनुभूति होती है।

कपूरी देशी पान की पत्तियां पीले हरे रंग की दीर्घ वृत्ताकार, डंठल की लंबाई 6.94 सेमी. डंठल की मोटाई 1.69 सेमी., पत्ती की लंबाई 9.70 सेमी. तथा चौड़ाई 6.64 सेमी. पत्ती क्षेत्र सूचकांक 3.94 सेमी. पत्ती का वजन 12.84 ग्राम तथा पत्तियों की उपज 80-85 प्रति पौध है।

कपूरी पान के पंजीयन करने में डॉ. नितिन रस्तोगी, डॉ.एलिस तिरकी, डॉ. आरती गुहे, डॉ. बीएस असाटी एवं डॉ. अविनाश गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल और निदेशक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में यह कार्य सम्पन्न हो सका।

यह भी पढ़े: महतारी वंदन योजना पर आया बड़ा अपडेट, इन महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे पैसे, फटाफट करा लें यह काम नहीं तो....


बड़ी खबरें

View All

राजनंदगांव

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग