
CG News: पाठय पुस्तक निगम से बच्चों को बांटने के लिए भेजी गई किताबों को रद्दी में बेचने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। 30 टन किताबों को रद्दी में बेचने की बात सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षा विभाग के अफसर इसे डिपो का मसला बता रहे हैं, तो डिपो प्रभारी ने भी मामले में अनभिज्ञता जताते हुए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी पर सारा दोष मढ़ दिया है। बता दें कि स्कूलों में बंटने के लिए आई किताबों को कबाड़ में रद्दी के भाव में बेचने का सनसनी खेज खुलासा दुर्ग-रायपुर जिले में हुआ।
वहां कबाड़ियों ने राजनांदगांव डिपो से भी किताबें खरीदने की बात स्वीकारी। इसके बाद जांच के लिए गठित टीम ने पुस्तक घोटाले के मामले में यहां के अफसरों से भी पूछताछ की है। पूछताछ में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ने 16 टन किताब बेचने की बात स्वीकारी है। इसके बाद डिपो प्रभारी सहित सभी अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में आ गए हैं।
शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए डिपो से 33 लाख 96 हजार 365 किताबें बच्चों को बांटने के लिए भेजी गई। अफसर 33 लाख 22 हजार 388 किताबों को बांटने का दावा कर रहे हैं। 73 हजार 977 को बचत बताया जा रहा। जबकि आशंका जताई जा रही है कि मिली भगत करते हुए डिपो के अधिकारी-कर्मचारियों ने लाखों रुपए की किताबें चुपके से रद्दी में बेचकर राशि डगार लिए होंगे। छग पैरेंट्स एसोसिएशन ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस से प्रशासन से करते हुए जांच की मांग रखी है।
Published on:
03 Oct 2024 02:52 pm
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