
आरटीई की सीटें 1700 से घटकर अब 535 तक पहुंच गई (फाइल फोटो- पत्रिका)
RTE News: शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों में कटौती के मामले में आज 8 अप्रैल तक राज्य सरकार से हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है। इसके बाद अहम फैसला आएगा। इस निर्णय पर हजारों गरीब और वंचित बच्चों का भविष्य टिका हुआ है।
राज्य सरकार पर आरोप है कि निजी स्कूल एसोसिएशन के दबाव में आकर केंद्र के कानून की मूल भावना से छेड़छाड़ की गई और प्रदेशभर में आरटीई सीटों की संख्या घटा दी गई। राजनांदगांव जिले की स्थिति चिंताजनक है। अविभाजित राजनांदगांव में पिछले वर्ष तक करीब 4500 सीटें थीं, जबकि अकेले राजनांदगांव जिले में 1700 सीटें उपलब्ध थीं।
इस वर्ष यह संख्या घटकर मात्र 535 रह गई हैं। इसके विपरीत 1800 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, यानी हर सीट पर औसतन चार बच्चों की दावेदारी बन रही है। शिक्षा विभाग ने भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने की बात कही है। आरटीई की सीटों के लिए ऑनलाइन लॉटरी 13 से 27 अप्रैल के बीच निकाली जाएगी।
पहले नियम के अनुसार, निजी स्कूलों को नर्सरी या पहली कक्षा में दर्ज संख्या के आधार पर 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य था, लेकिन राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए प्रवेश को केवल पहली कक्षा तक सीमित कर दिया। इसका असर यह हुआ कि जिन स्कूलों ने पहले ही नर्सरी में प्रवेश दे दिया, उन्होंने पहली कक्षा में सीटें शून्य घोषित कर दीं। जिले के लगभग 80 प्रतिशत स्कूलों में यही स्थिति बन गई है।
निजी स्कूलों पर सीटें दबाने के आरोप भी लगे हैं। कई स्कूलों में एक कक्षा के तीन-चार सेक्शन होने के बावजूद केवल एक सेक्शन की जानकारी दी जाती है, जिससे आरटीई सीटें कम हो जाती हैं। साथ ही चयनित बच्चों को कॉपी-किताब और ड्रेस जैसी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
प्रवास बघेल, डीईओ राजनांदगांव के मुताबिक, कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है। केंद्र सरकार ने आरटीई के नियमों में बच्चों की उम्र 6 से 14 साल तक निर्धारित की है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने नर्सरी से पहली तक की राशि खुद वहन करने का निर्णय लिया था, वर्तमान सरकार ने इसमें बदलाव की।
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Updated on:
08 Apr 2026 08:01 pm
Published on:
08 Apr 2026 08:00 pm
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