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CG News: डोंगरगढ़ क्षेत्र के बरनाराकला स्थित उच्चतर माध्यमिक स्कूल में एनएसएस कैंप में बीमार हुए बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के लिए विशेष धर्मस्थल ले जाने का मामला सामने आया है। बड़ी बात यह है कि इस कैंप की सूचना शिक्षा विभाग को नहीं दी गई थी। मामले की शिकायत होने के बाद हड़कंप मच गया है। एसडीएम मनोज मरकाम ने मामले की जांच का आदेश देकर एक दिन में रिपोर्ट देने कहा है।
शा. उच्चर माध्यमिक शाला बरनाराकला में 24 से 30 दिसंबर तक एनएसएस कैंप का आयोजन किया गया, जहां बोरतलाव स्कूल के 49 छात्र-छात्राएं पहुंच हुए थे।
सात दिवसीय कैंप के दूसरे दिन ही छात्राओं की तबीयत बिगडऩे लगी। प्रभारी शिक्षक इन छात्राओं को अस्पताल ले जाने के बजाए झाड़-फूंक के लिए बरनारा स्थित धर्मस्थल ले गया। 29 दिसंबर को भी बच्चों की फिर तबीयत बिगड़ी और उन्हें फिर वहीं ले जाया गया।
बरनाराकला के सरपंच लीलाराम धुर्वे ने मामले में आपत्ति दर्ज कराई और इस घटना की जानकारी बोरतलाव सरपंच को दी। इसका खुलासा होते ही कैंप में हडक़ंप मच गया। देर रात मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि छात्राएं स्कूल के कमरे में बेहोशी की हालत थीं।
कैंप को लीड कर रहे शिक्षक विद्यानंद डोंगरे ने बताया गया कि कैंप लगाने की सूचना बीईओ को दी गई थी। नियमानुसार कैंप में 49 बच्चे थे, जिसमें 21 छात्र और 28 छात्राएं थीं। छात्र-छात्राओं की देखरेख के लिए कंचना यादव व मेरी ड्यूटी लगाई गई थी।
घटना की जानकारी प्रधानपाठिका वंदना चौरे को मिलने पर देर रात कैंप पहुंचीं और बीमार छात्राओं को अपने गाड़ी में बिठाकर देर रात उनके घर छोड़ दिया।
Published on:
31 Dec 2024 08:04 am
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