3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीताफल बनेगा किसानों की नई पहचान, 2.5 हैक्टेयर में बगीचा, 19.25 लाख का बजट स्वीकृत

पहाड़ी इलाकों की ठंडी हवाओं और प्राकृतिक स्वाद का तोहफा माना जाने वाला सीताफल अब जिले की पहचान बनने जा रहा है।

2 min read
Google source verification
SItafal

SItafal

राजसमंद. पहाड़ी इलाकों की ठंडी हवाओं और प्राकृतिक स्वाद का तोहफा माना जाने वाला सीताफल अब जिले की पहचान बनने जा रहा है। एक जिला, एक उपज योजना के तहत राजसमंद में 2.5 हैक्टेयर क्षेत्र में सीताफल का बगीचा तैयार किया जाएगा। इसके लिए 19.25 लाख रुपए का बजट तय किया गया है। इसमें विभागीय मद से 4.5 लाख और पंच गौरव मद से 14.75 लाख रुपए शामिल हैं। यह परियोजना राष्ट्रीय बागवानी मिशन 2025-26 के अंतर्गत प्रशासनिक स्वीकृति पा चुकी है। जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक किसानों को प्रशिक्षण, भ्रमण, पौध वितरण और चयन प्रक्रिया की कार्ययोजना बनाई गई है।

50 किसानों को मिला प्रशिक्षण

उद्यान विभाग ने पहले चरण में 50 किसानों को सीताफल की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया है। अब तक यह फल केवल पहाड़ियों और जंगलों तक सीमित था, लेकिन सरकार की इस योजना से यह किसानों की मुख्य आय का स्रोत बन सकेगा।

क्यों खास है सीताफल

  • इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और कैंसररोधी तत्व पाए जाते हैं।
  • बीजों में प्राकृतिक कीटनाशक गुण होते हैं।
  • दूध में मिलाकर बने शरीफा शेक और आइसक्रीम का स्वाद बेमिसाल है।

वैज्ञानिक खेती का फार्मूला

उद्यान विभाग का कहना है कि यदि सीताफल की खेती वैज्ञानिक ढंग से की जाए तो उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है।

  • पौधे लगाने की दूरी – 4x4 मीटर (625 पौधे/हेक्टेयर)
  • रोपण का सही समय – जुलाई माह
  • खाद – सड़ी हुई गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट
  • सिंचाई – ड्रिप सिस्टम सबसे उपयुक्त
  • कटाई-छंटाई – दिसंबर-जनवरी में रोगग्रस्त डालियां हटाना जरूरी
  • उपज – 6-7 साल पुराने पेड़ से औसतन 100-150 फल, यानी लगभग 7-8 टन प्रति हेक्टेयर

बढ़ती मांग और बाजार

आज सीताफल केवल ताजा फल ही नहीं बल्कि इसके गूदे की भी फूड इंडस्ट्री में बड़ी मांग है। मिठाई, आइसक्रीम और शेक बनाने में इसका गूदा खूब उपयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि राजसमंद का सीताफल किसानों को अच्छे दाम दिलाने का वादा करता है।

सरकारी अनुदान की मदद

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को आकर्षक अनुदान मिलेगा –

  • प्रति हेक्टेयर 75,000 रुपए लागत पर
  • सामान्य किसानों को 40% अनुदान
  • अनुसूचित क्षेत्र के किसानों को 50% अनुदान
  • ड्रिप सिंचाई संयंत्र पर 70-75% तक अनुदान
  • अधिकतम 2 हेक्टेयर तक लाभ

किसान ई-मित्र या एसएसओ आईडी के जरिए राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

किसानों के लिए वरदान

विशेषज्ञ मानते हैं कि सीताफल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है। सूखे और पहाड़ी क्षेत्रों में यह किसानों की आय बढ़ाने वाला गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

कल्प वर्मा, उपनिदेशक उद्यान, राजसमंद का कहना है “सीताफल को लेकर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार ने इसे पंच गौरव योजना में शामिल किया है। आने वाले समय में इसका बगीचा किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनेगा।”