
SItafal
राजसमंद. पहाड़ी इलाकों की ठंडी हवाओं और प्राकृतिक स्वाद का तोहफा माना जाने वाला सीताफल अब जिले की पहचान बनने जा रहा है। एक जिला, एक उपज योजना के तहत राजसमंद में 2.5 हैक्टेयर क्षेत्र में सीताफल का बगीचा तैयार किया जाएगा। इसके लिए 19.25 लाख रुपए का बजट तय किया गया है। इसमें विभागीय मद से 4.5 लाख और पंच गौरव मद से 14.75 लाख रुपए शामिल हैं। यह परियोजना राष्ट्रीय बागवानी मिशन 2025-26 के अंतर्गत प्रशासनिक स्वीकृति पा चुकी है। जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक किसानों को प्रशिक्षण, भ्रमण, पौध वितरण और चयन प्रक्रिया की कार्ययोजना बनाई गई है।
उद्यान विभाग ने पहले चरण में 50 किसानों को सीताफल की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया है। अब तक यह फल केवल पहाड़ियों और जंगलों तक सीमित था, लेकिन सरकार की इस योजना से यह किसानों की मुख्य आय का स्रोत बन सकेगा।
उद्यान विभाग का कहना है कि यदि सीताफल की खेती वैज्ञानिक ढंग से की जाए तो उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है।
आज सीताफल केवल ताजा फल ही नहीं बल्कि इसके गूदे की भी फूड इंडस्ट्री में बड़ी मांग है। मिठाई, आइसक्रीम और शेक बनाने में इसका गूदा खूब उपयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि राजसमंद का सीताफल किसानों को अच्छे दाम दिलाने का वादा करता है।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को आकर्षक अनुदान मिलेगा –
किसान ई-मित्र या एसएसओ आईडी के जरिए राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सीताफल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है। सूखे और पहाड़ी क्षेत्रों में यह किसानों की आय बढ़ाने वाला गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
कल्प वर्मा, उपनिदेशक उद्यान, राजसमंद का कहना है “सीताफल को लेकर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार ने इसे पंच गौरव योजना में शामिल किया है। आने वाले समय में इसका बगीचा किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनेगा।”
Published on:
24 Sept 2025 03:16 pm
बड़ी खबरें
View Allराजसमंद
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
