
##Andhvishwas अंधविश्वास बना रहा ‘पागल’ : परिजन भी वक्त पर नहीं करवा रहे इलाज, बीमारी बेकाबू
राजसमंद. गांव से लेकर शहर तक शिक्षित व युवा पीढ़ी भी रूढ़ीवादी परंपरा व अंधविश्वास के चलते अपने ही परिजनों की जिन्दगी बर्बाद करने पर तुले हैं। तभी परिवार में किसी सदस्य के अचानक असामान्य बर्ताव, चिड़चिढ़ापन, ज्यादा बोलने, दौड़- भाग, कपड़े उतार देने की विकृतियां उत्पन्न पर तत्काल अस्पताल ले जाने की बजाय अंधविश्वास के चलते दैवीय प्रभाव मानते हुए मंदिर में भोपे व ओझा से झाड़ फूंक कराने में लगे रहते हैं। जिला अस्पताल में पिछले पांच साल में जितने भी मानसिक विक्षिप्त का उपचार कराने आए हैं, उनमें ज्यादातर विक्षिप्तों का झाड़ फूंक से इलाज नहीं करवाना सामने आया। इससे अंधविश्वास के चक्कर में फंसी शिक्षित व आधुनिक युवा पीढ़ी हकीकत भी सामने आ गई। प्रचार प्रसार के अभाव में आज भी कई लोग बेखबर है कि विक्षिप्त का अस्पताल में इलाज संभव है। आरके जिला चिकित्सालय राजसमंद में पांच साल की समयावधि में करीब छह हजार विक्षप्ति उपचार के लिए आए, मगर अंधविश्वास के चलते कई विक्षिप्त आज भी नियमित इलाज नहीं ले पा रहे हैं। नियमित उपचार, परामर्श के अभाव में न तो मानसिक विक्षिप्त ठीक हो पाए और न ही तत्काल उपचार संभव है।
मानसिक विक्षिप्त एक बीमारी है
शारीरिक विकलांग के प्रति हर कोई सहानुभूति रखता है, मगर मानसिक रोगी के प्रति कोई ध्यान नहीं देता। विक्षिप्त को अक्सर पागल करार देते हुए हर कोई उससे किनारा ले लेता है। अंधविश्वास में भूत- प्रेत व देवी देवता का दोष मान लेते हैं। विक्षिप्त में एक अवसाद मानसिक बीमारी है, जिससे वापस आसानी से उबर सकते हैं।
यह है मुख्य लक्षण
- लंबे समय तक दुखी रहना (दो सप्ताह से ज्यादा)
- रूचिकर गतिविधि में भी दिलचस्पी न रखना
- अकेलापन महसूस करना
- कमजोर एकाग्रता, नींद में कमी, भूख में कमी
- चिंता, घबराहट, हर बात पर चिड़चिड़ापन
- नशे या शराब की ओर झुकाव
- आत्मसम्मान में कमी
- असहयोग, निराशा और निकम्मापन के विचार
- निराशावादी दृष्टिकोण
उपचार और दवाएं भी मुफ्त
आरके जिला चिकित्सालय में मानसिक विमंदित व विक्षिप्त के उपचार की व्यवस्था है और दवाइयां भी मुफ्त में उपलब्ध है। मनो चिकित्सक से नियमित काउंसलिंग दी जाती है। इसके लिए लगातार दवा के साथ चिकित्सकीय काउंसलिंग जरूरी है, तभी इलाज की सार्थकता है। विशेष परिस्थिति में उदयपुर रेफर किया जा सकता है।
समय पर इलाज कराने पर संभव
अगर समय पर मनो चिकित्सक की सलाह लेते हुए उपचार कराया जाए, तो विक्षिप्तता से आसानी से उबर सकते हैं। आम तौर पर शिक्षित वर्ग भी सीधे अस्पताल की बजाय अंधविश्वास के चलते दैवीय प्रकोप, भूत-प्रेत व बुरी नजर उतारने के लिए मंदिर व भोपे के चक्कर में टोने टोटके कराते हैं।
डॉ. शिशुपालसिंह चौधरी, जिला नोडल अधिकारी राष्ट्रीय मानसिक कार्यक्रम एवं जिला चिकित्सालय राजसमंद
Published on:
14 Aug 2018 12:30 pm
