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पार्टियों का राज, बागियों को नहीं मिला ताज

-भीम से 1957 में फतेहसिंह ही बने एक मात्र निर्दलीय विधायक-जिले की चार विधानसभाओं का इतिहास
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पार्टियों का राज, बागियों को नहीं मिला ताज

अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. पार्टियों से बगावत करना राजसमंद में प्रत्याशियों के लिए महंगा साबित हुआ है। जिले की तीन विधानसभा राजसमंद, नाथद्वारा, कुंभलगढ़ में कई दिग्गजों ने पार्टियों से बगावत तो की लेकिन यहां की जनता ने उन्हे निर्दलीय के रूप में स्वीकार नहीं किया। वे चुनाव तभी जीते हैं जब उन्हें किसी पार्टी ने टिकट दिया। यह बात साबित होती है चारों विधानसभा की अबतक सीटों का आकलन करने पर। जिले की तीनों विधानसभाओं के इतिहास में एक भी प्रत्याशी ऐसा नहीं है, जो पार्टी से बगावत कर निर्दलीय खड़ा हुआ हो और जनता ने उसे चुन लिया हो। जिले की भीम विधानसभा में सिर्फ 1957 के चुुनाव में फतेहसिंह रावत ही एक ऐसा नाम है, जिन्होंने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। उन्हें भी किसी पार्टी का बागी नहीं कहा जा सकता। इधर चारों विधानसभाओं में अबतक के इतिहास में कांग्रेस का पलड़ा भाजपा से भारी रहा है। अबतक के हुए चुनाव में आधे से ज्यादा बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।


ये प्रमुख दिग्गज बागी होकर लड़े चुनाव
जनसंघ से हीरालाल कटारिया ने पार्टी से बगावत की और निर्दलीय मैदान में उतरे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसीतरह कांग्रेस से रघुनाथ पालीवाल, कांग्रेस से रामेश्वर आसावा, भाजपा से शांतिलाल खोईवाल, रोशनलाल बड़ोला, भीम-देवगढ़ विधानसभा से कांग्रेस से बगावत कर लक्ष्मणसिंह रावत आदि पार्टियों से बागी होकर मैदान में उतरे लेकिन उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिला। जबकि यह नेता पार्टी में दिग्गजों की श्रेणी में गिने जाते रहे।


चुनाव में महिलाओं की अनदेखी
महिलाओं के हितों के बड़े-बड़े दावे करने वाले दोनों ही प्रमुख दल जनसंघ (अब भाजपा) और कांग्रेस ने 1951 से आजतक कुंभलगढ़ और नाथद्वारा विधानसभा सीट से किसी भी महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है। चार विधानसभा वाले राजसमंद जिले में सिर्फ दो विधानसभा राजसमंद और भीम में एक-एक महिला को मौका दिया गया। जिसमें भीम ने सबसे पहले वर्ष 1962 में महिला प्रत्याशी को मौका दिया। देवगढ़ राजघराने की लक्ष्मी कुमारी यहां की पहली महिला विधायक चुनी गईं, उसके बाद पुन: 1967 के चुनाव में उन्हें ही जीत मिली। बाद में 1985 में एक बार फिर क्षेत्र की जनता ने उन्हें विधायक चुना। इसीतरह राजसमंद विधानसभा में पहलीबार 2008 में किरण माहेश्वरी को पहली महिला विधायक चुना गया, इसके बाद उन्होंने 2013 के चुनाव में भी जीत दर्ज की।


राजसमंद विधानसभा: 13 चुनाव में सात बार जीत
राजसमंद विधानसभा में प्रथम चुनाव 1957 में हुए। यहां कांग्रेस से निर्जननाथ आचार्य को चुना गया। 1962 में फिर कांग्रेस से आचार्य चुने गए। 1967 में कांग्रेस के अमृतलाल यादव ने जीत दर्ज की। 1972 में फिर से कांग्रेस ने बाजी मारी और नानालाल ने जीत दर्ज की। 1977 में जेएनपी से कैलाशचंद्र मेघवाल, 1980 में फिर से कांग्रेस के नानालाल तथा 1985 में कांग्रेस के मदनलाल चौहान, 1990 में भाजपा से शांतिलाल खोइवाल, 1995 में फिर से भाजपा के खोइवाल तथा 1998 में कांग्रेस से बंशीलाल गहलोत, 2003 में भाजपा से बंशीलाल खटिक तथा उसके बाद 2008 में भाजपा से किरण माहेश्वरी, 2013 में पुन: भाजपा से माहेश्वरी विधायक चुनी गईं।


भीम विधानसभा: यहां भी भाजपा पर कांग्रेस भारी
भीम विधानसभा क्षेत्र में अबतक 14 बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें सात बार कांग्रेस का राज रहा है। यहां प्रथम विधायक 1951 जनसंघ के संग्राम सिंह बने। फिर 1957 में निर्दलीय के रूप में फतेहसिंह ने यहां इतिहास रचा। इसके बाद 1962 में कांग्रेस से लक्ष्मी कुमारी, 1967 में पुन: लक्ष्मी कुमारी, 1972 में कांग्रेस से ही चिमनसिंह भाटी, 1977 में जेएनपी से मेजर फतेहसिंह चुने गए। 1980 में एक बार फिर जनता ने कांग्रेस की लक्ष्मी कुमारी को विधायक चुना। 1985 में कांग्रेस से लक्ष्मणसिंह रावत, 1990 में जनता दल से मानधाता सिंह, 1995 में कांग्रेस से लक्ष्मणसिंह रावत, 1998 में पुन: कांग्रेस से लक्ष्मणसिंह रावत ने जीत दर्ज के उसके बाद से 2003, 2008, 2013 के चुनाव में लगातार भाजपा के हरीसिंह रावत विधायक चुने गए।


कुंभलगढ़ में भी कांग्रेस रही आगे
यहां भी प्रथम चुुनाव 1951 में हुए और प्रथम विधायक बीजेएस से विजयसिंह चुने गए। 1957 मेें कांग्रेस से मनोहर कोठारी, 1962 में एसडब्ल्यूए से गोविंदसिंह, 1967, 1972 में लगातार दो बार कांग्रेस से हीरालाल देवपुरा, 1977 में जेएनपी से गोविन्द सिंह, तथा 1980, 1985, 1990 में कांगे्रस के हीरालाल देवपुरा को चुना गया। 1995 में भाजपा से सुरेन्द्र सिंह राठौड़ तथा 1998 फिर से कांग्रेस के देवपुरा को चुना गाय। 2003 में भाजपा से सुरेन्द्र सिंह राठौड़, 2008 में कांग्रेस से गणेश सिंह परमार व 2013 में फिर से भाजपा के सुरेन्द्र सिंह राठौड़ विधायक बने।


नाथद्वारा विधानसभा:
1957 में कांग्रेस से किसनलाल, 1962 मेें जनसंघ से विजयसिंह, 1967 में कांग्रेस से किसनलाल, 1972 में कांग्रेस से मनोहरलाल, 1977 में जेएनपी से नवनीत कुमार, 1980, 1985 में कांग्रेस से सीपी जोशी, 1990, 1995 में भाजपा से शिवदानसिंह चौहान, 1998, 200३ में कांग्रेस से डॉ. सीपी जोशी, 2008 व 2013में कल्याणसिंह चौहान विधायक चुने गए।

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