
सीमित समय ही सही, रावली की वादियां खींच लाई सैलानियों को
देवगढ़. रेलों का संचालन समय भले ही सही नहीं है, लेकिन जैव वैविध्य को समेटे रावली टाडगढ़ अभ्यारण्य का नैर्सिगक सौन्दर्य आखिर रविवार के अवकाश के दिन पर्यटकों को गोरमघाट खींच ही लाया।
बारिश के मौसम में अवकाश के दिन गोरमघाट पर हर वर्ष पर्यटकों की बहार रहती आई है। इस बार रेलों का संचालन समय सही नहीं होने से यहां पर्यटकों को भ्रमण के लिए एक घण्टे का समय भी नहीं मिल पा रहा है। इसके बावजूद अच्छी बारिश होने के बाद पहले ही रविवार को यहां पर्यटक पहुृंचे बिना नहीं रह पाए। भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर के कई पर्यटक अपने वाहनों से कामलीघाट पहुंचे और यहंा से ट्रेन में सवार होकर गोरमघाट गए। हालांकि, इस बार भीड़ कुछ कम ही नजर आई। कामलीघाट में प्रात: 11 बजे ट्रेन में सवार होने के दौरान पर्यटकों ने बताया कि पूर्व में सूचना मिली थी कि अब कभी-भी ट्रेन बन्द होने वाली है। इसलिए सोचा कि ट्रेन बन्द होने से पहले गोरमघाट के अलौकिक दृश्यों को देखा जाए और झरने का आनन्द लिया जाए। हालांकि, समय कम मिलने की बात पर वे रेलवे विभाग को कोसते नजर आए। उन्होंने कहा कि रेलवे की हठधर्मिता के चलते इस पर्यटनस्थल पर भी लोग जाने में अब संकोच करने लगे हंै। ज्ञात रहे की मावली-मारवाड़ रेल खण्ड के कामलीघाट से 14 किलोमीटर दूर गोरमघाट पहुंचने के लिए रेल को करीब एक घन्टे का समय लगता हें।
यह है देखने लायक नजारे
वर्ष 1937-38 में मेवाड़ स्टेट के समय दुर्गम पहाड़ों व खाईयों के बीच निकाली गई इस रेल्वे लाइन को घुमावदार, घाटी, पहाड़ी ढलान व गहरी खाईयों के बीच निकाला गया हैं, गौरमघाट पहुंचने के लिए पर्यटकों को सिर्फ रेल का ही सहारा है। गोरमघाट से कामलीघाट के बीच दो गुफाएं हैं, जिनसे रेल गुजरती है। करीब पांच सौ से सात सौ मीटर लम्बी ये गुफाएं बारिश में हर समय पहाड़ी पानी से भीगी रहती है। कामलीघाट से फुलाद तक के 21 किलोमीटर मार्ग पर रेल की गति सीमा 19 किलोमीटर प्रति घण्टा है। कामलीघाट से गोरमघाट जाते समय ढलान, मोड़ व गहरी खाईयां होने के कारण रेल सिग्नल नम्बर 1 व 2 पर रुक कर आगे बढ़ती है। रेल के इस सफर के दौरान अनेक बार रेल का इन्जिन व पीछे का डिब्बा आसानी से नजर आता है। वहीं अनेक बार मारवाड़ के मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं।
सडक़ मार्ग से पहुंच सकते हैं पैदल
सडक़ मार्ग की पहुंच यहां दुर्लभ हैं। हालांकि, देवगढ़ के समीप काछबली से मेंडिया होते पाल्यावास तक मोटरसाईकिल से पहुचा जा सकता हैं, जहां से जोगमंडी होते हुए झरने तक ५०० मीटर पैदल चलना पड़ता है। इसी तरह फुलाद स्टेशन के बाहर भी अपने वाहनों को खड़ा कर गौरमघाट तक पैदल पहुंचा जा सकता है।
Published on:
23 Jul 2018 12:44 pm
