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World Blood Donor Day : 1 यूनिट ब्लड को 4 हिस्सों में बांटती है ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन, अस्पताल में यह क्यों है जरूरी जानें

World Blood Donor Day : आज 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस है। अस्पताल में ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन बेहद जरूरी है। इस मशीन के उपयोग से एक यूनिट ब्लड को चार हिस्सों में बांटा जाता है जो बहुत ही जरूरी है। जानें ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन कैसे एक यूनिट ब्लड को 4 मरीजों के लिए उपयोगी बनाती है।

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World Blood Donor Day Blood Component Separator Machine Divides 1 Unit Blood into 4 Parts why this Machine Necessary in Hospital

World Blood Donor Day : अस्पताल में ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन क्यों है बेहद जरूरी

World Blood Donor Day : आज 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस है। ताज्जुब है कि राजसमंद जिले में कहीं भी ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन नहीं हैं। अस्पताल में ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन बेहद जरूरी है। राजसमंद जिला मुख्यालय स्थित आर.के.राजकीय चिकित्सालय में ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन बेहद जरूरी हो गई है। इससे एक यूनिट खून चार लोगों के काम आ सकता है। चिकित्सालय CDSCO के मानकों को पूरा कर रहा है। जिले में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं संस्थाओं की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। एक यूनिट ब्लड में आरबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और डब्ल्यूबीसी होता है। पर मरीज को ब्लड के एक या दो घटकों की ही आवश्यकता होती है। पर मीशन न होने की वजह से पूरे ब्लड का उपयोग नहीं हो पाता है। अगर अस्पताल में ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन होती तो ब्लड की बचत हो जाती और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी इसके लिए मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

रक्त संग्रहण पर एक नजर

वर्ष - संग्रहण - खपत
2017- 4007 - 3939
2018- 4343 - 4323
2019- 4882 - 4612
2020- 3935 - 4138
2021- 4498 - 4484
2022- 6108 - 6067
2023- 5200 - 5000
2024- 2336 - 2340 (अभी तक)

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पूरी यूनिट होती है स्थापित

ब्लड सेपरेटर मशीन एवं इकाई स्थापना के लिए ब्लड कपोनेंट सेपरेटर मशीन, डीप फ्रीजर, कप्यूटर सिस्टम एवं काउंटर सहित कई तरह के उपकरण की आवश्यकता होगी। ब्लड सेपरेटर मशीन करीब एक करोड़ रुपए की आएगी। इसके लिए अलग से भवन की आवश्यकता होगी। वर्तमान में ब्लड बैंक में सिर्फ दो बेड लगे हैं, जबकि नई यूनिट बनने पर करीब 10 बेड की आवश्यकता होगी।

लाइसेंस मिलने में भी नहीं होनी चाहिए अड़चन

जानकारों के अनुसार रक्त घटक विभाजक मशीन और पूरी यूनिट की स्थापना के लिए कंट्रोल ड्रग स्टैण्डर्ड सेंटल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत नियामक संस्था लाइसेंस जारी करती है। मेडिकल डिवाइस विनियमन 2017 और ड्रग एंड कॉस्टमेटिक अधिनियम 1940 और नियम 1945 के तहत यह काम करती है। जानकारों के अनुसार लगातार तीन सालों तक पांच-पांच हजार यूनिट रक्त संग्रहण की अनिवार्यता की शर्त को भी आर.के. स्थित ब्लड बैंक पूरा कर रहा है।

CDSCO के मानकों को भी कर रहे पूरा, फिर भी नहीं मिल रही सुविधा

मनुष्य की खून में पैक्ड आरबीसी (लाल रक्त कणिकाएं), प्लेटलेट्स, प्लाजमा और डब्ल्यूबीसी (श्वेत रक्त कणिकाएं) होती है। ऐसे में जरूरी नहीं की मरीज, बीमार या घायल को इन चारों घटक की आवश्यकता होती है, लेकिन ब्लड कॉपोनेंट सेपरेटर मशीन की सुविधा नहीं होने के कारण मरीज अथवा बीमार व्यक्ति को चारों घटक चढ़ाना पढ़ता है।

जहां मेडिकल कॉलेज वहां होती है यह व्यवस्था

आर.के. राजकीय चिकित्सालय राजसमंद पीएमओ, डॉ. रमेश रजक ने बताया कि सरकार की ओर से जहां पर मेडिकल कॉलेज होता है, वहां पर ब्लड सेपरेटर यूनिट उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए कई पैरामीटर्स होते हैं, यह पूरी यूनिट होती है। हालांकि कभी-कभी ब्लड सेपरेटर मशीन की आवश्यकता महसूस तो होती है।

जिला चिकित्सालय में मशीन बेहद जरूरी

रेडक्रॉस सोसायटी राजसमंद मानद सचिव बृजलाल कुमावत ने कहा जिला चिकित्सालय में ब्लड सेपरेटर मशीन बेहद जरूरी है। इससे मरीजों को फायदा होगा और एक यूनिट खून कई लोगों के काम आ सकेगा। रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से समय-समय पर इसकी मांग भी की जा रही है। जिला चिकित्सालय सीडीएससीओ के मानकों को भी पूरा कर रहा है।

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