
जौहर विश्वविद्यालय (photo- @indiatomorrow)
Jauhar University Demolition:रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सियासी और कानूनी लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के बीच समाजवादी पार्टी की पूर्व सांसद और आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि मामला सिर्फ एक संस्थान का नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों और जनता के हित से भी जुड़ा है।
तजीन फातिमा ने कहा कि वह सरकार से देश और जनता के हित में ध्वस्तीकरण के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग करेंगी। उन्होंने कहा, “सरकार को तय करना है कि क्या राजनीति इसी तरह चलेगी?” उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूनिवर्सिटी बंद होती है तो उसका असर दोनों पक्षों पर पड़ेगा, हालांकि उनका मानना है कि वे कमजोर स्थिति में हैं।
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने 15 जुलाई 2026 को जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण के अनुसार इन भवनों के निर्माण के लिए जरूरी नक्शे की स्वीकृति नहीं ली गई थी। यूनिवर्सिटी प्रशासन को आदेश के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने का मौका दिया गया। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी। इसके बाद छात्रों ने भी परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू किया। छात्रों की मुख्य चिंता यह थी कि यदि बड़ी संख्या में भवनों पर कार्रवाई होती है तो उनकी पढ़ाई, परीक्षा और डिग्री पर इसका असर पड़ सकता है।
इस मामले में फिलहाल यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत मिली हुई है। 27 जुलाई को मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। इसके बाद छात्रों ने अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त कर दिया था। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और 13 अगस्त को सुनवाई टलने की खबर सामने आई थी। यानी फिलहाल ध्वस्तीकरण को लेकर अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
यूनिवर्सिटी को लेकर पूछे गए सवाल पर तजीन फातिमा ने कहा कि वह सरकार से “देश हित और जनता के हित” में ध्वस्तीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करेंगी। उन्होंने राजनीति के मौजूदा तरीके पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार को खुद तय करना होगा कि राजनीति इसी तरह आगे चलेगी या नहीं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब जौहर यूनिवर्सिटी का मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। सपा लगातार इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि निर्माण संबंधी नियमों और स्वीकृतियों के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की गई है।
ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में पढ़ने वाले छात्रों की चिंता भी सामने आई थी। कई छात्रों ने कहा कि भवनों पर कार्रवाई होने की स्थिति में उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों को डिग्री और आगे की पढ़ाई को लेकर भी चिंता थी। यही वजह है कि तजीन फातिमा अब सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रही हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी के भवनों को लेकर अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल तस्वीर साफ है कि जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की कार्रवाई तत्काल नहीं हो रही है। 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला कानूनी प्रक्रिया में है और अंतरिम रोक के चलते यूनिवर्सिटी को फिलहाल राहत मिली हुई है।
Updated on:
18 Aug 2026 02:03 pm
Published on:
18 Aug 2026 02:03 pm
