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जौहर यूनिवर्सिटी पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण पर स्टे बरकरार

Jauhar University Rampur News: रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण मामले में मंडलायुक्त की अदालत ने अंतरिम रोक बरकरार रखी है। फिलहाल यूनिवर्सिटी की इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी। जानिए कोर्ट ने पूरे मामले पर क्या कुछ कहा...
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जौहर विश्वविद्यालय (photo- @indiatomorrow)

Jauhar University Demolition Stay Continues: उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दायर अपील पर गुरुवार को मुरादाबाद मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह की अदालत में अहम सुनवाई हुई। इस सुनवाई के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर फिलहाल रोक बरकरार रखी गई है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं।

DM के आदेश पर पहले ही लगी थी रोक

रामपुर डीएम ने यूनिवर्सिटी की इन इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए मुरादाबाद मंडलायुक्त ने बीते 27 जुलाई को ही इस ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद 3 अगस्त को हुई सुनवाई में अंतरिम राहत को 10 अगस्त तक बढ़ाया गया था। अब 13 अगस्त को हुई सुनवाई में इसी रोक को आगे के लिए बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी की ये 38 इमारतें बुलडोजर की कार्रवाई से सुरक्षित रहेंगी।

अभी नहीं आई पूरी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं। जौहर यूनिवर्सिटी के वकील जुनैद एजाज ने बताया कि मंडलायुक्त की तरफ से रामपुर के SDM से जो विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी वह अभी तक अदालत में नहीं पहुंची है। वहीं रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के वकील ने बताया कि अदालत में कुछ खास बिंदुओं पर बहस हुई थी। उन्होंने बताया कि जो रिपोर्ट मंगवाई गई थी वह अधूरी थी इसलिए उसे वापस कर दिया गया है। अदालत ने अभी अगली सुनवाई की कोई नई तारीख तय नहीं की है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी की कुल 40 में से 38 इमारतों को गिराने के प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि इस यूनिवर्सिटी की स्थापना समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और UP के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने की थी। रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) के तहत इन इमारतों को गिराने का सख्त आदेश दिया था।

अथॉरिटी का सीधा आरोप है कि ये सभी इमारतें भवन योजना की उचित मंजूरी लिए बिना ही अवैध रूप से बनाई गई थीं। इस मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में आवाज उठा चुके हैं और उन्होंने इस संबंध में छात्रों तथा अभिभावकों के नाम एक खुला खत भी लिखा था। फिलहाल मंडलायुक्त की अदालत के आदेश के बाद जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी रहेगी।