
Jharkhand students protest (photo ANI)
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। सीबीआई (CBI) जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। अन्न-जल त्यागने के कारण कई अभ्यर्थियों की स्थिति बिगड़ने लगी है।
भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्रा ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उसने तीन दिनों से खाना-पीना छोड़ दिया है। खाना छोड़ने की वजह से मेरी सेहत बिगड़ रही है और मुझे धीरे-धीरे अस्वस्थ महसूस हो रहा है। अब देखना है कि सरकार हमारी मांगों पर कब ध्यान देती है। छात्रा ने बताया कि बुधवार को चिकित्सकों की टीम ने मौके पर पहुंचकर अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य और ब्लड प्रेशर की जांच की है। पिछले दिन की तुलना में मेरा BP कम हो गया।
आंदोलनरत छात्रों से वार्ता करने के लिए एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। केवल परीक्षा रद्द करना ही समाधान नहीं है; सरकार को यह गारंटी देनी होगी कि पुनः परीक्षा कब आयोजित होगी।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग रखी है कि रद्द करने के बाद छह महीने की तय सीमा के भीतर निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा का आयोजन कराया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने अभ्यर्थियों की समस्याओं, सुझावों एवं न्यायोचित मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें विश्वास दिलाया कि उनकी बात संगठन एवं सरकार के समक्ष पूरी मजबूती से रखी जाएगी।
भूख हड़ताल पर बैठे राहुल क्रांति ने बताया कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं,लेकिन मीडिया के माध्यम से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे सरकार का रवैया सकारात्मक नजर नहीं आ रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार अपनी एजेंसियों से जांच कराने की बात कह रही है, तो निष्पक्षता के लिए सीबीआई (CBI) जांच के आदेश देने में परहेज क्यों है? उन्होंने बताया कि पहले छात्र चाहते थे कि सरकार का प्रतिनिधिमंडल धरना स्थल पर आकर बात करे, लेकिन शासन की अनदेखी के बाद अब अभ्यर्थियों ने खुद अपना प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए भेजने का निर्णय लिया है।
हम पिछले तीन दिन से भूख हड़ताल पर हैं। हमारी सेहत लगातार बिगड़ रही। इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री ने नैतिक समर्थन तो दूर, छात्रों का हाल-चाल तक नहीं पूछा। छात्रों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 10 तारीख को प्रस्तावित विधानसभा का घेराव ऐतिहासिक होगा।
Updated on:
06 Aug 2026 11:18 am
Published on:
06 Aug 2026 11:18 am
