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रतलाम से अमरनाथ त्रिशूल लिए निकला बर्फानी भक्त

रतलाम से अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, कोई बस से तो कोई ट्रेन से कर रहा सफर, एक भक्त 12 किलो त्रिशूल लेकर निकला। यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यात्रा के दो मुख्य मार्ग हैं। पहलगाम और बालटाल।
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Baba Amarnath Yatra news ratlam

एक भक्त 12 किलो त्रिशूल लेकर निकला। यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यात्रा के दो मुख्य मार्ग हैं। पहलगाम और बालटाल।

रतलाम। अमरनाथ धाम के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का पहला जत्था मंगलवार शाम रतलाम से जम्मू तवी एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना हुआ। हर हर महादेव के जयकारों के साथ निकले इन भक्तों में अपूर्व उत्साह देखा गया। इस समूह में बलवीरसिंह पंवार नामक भक्त 12 किलो वजनी त्रिशूल लेकर यात्रा पर निकले हैं, जो अन्य श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।

पंवार ने बताया कि वे हर वर्ष अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं और यह त्रिशूल उनकी आस्था का प्रतीक है। इस वर्ष रतलाम से तीन हजार से अधिक भक्त अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले हैं। अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरूआत 3 जुलाई से होगी, जिसके लिए देश भर से श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए हैं। पंवार त्रिशूल लेकर रत्नेश्वर महादेव मंदिर से नितीन खत्री, जितू लालवानी, दिलीप के साथ मंगलवार शाम रवाना हुए। इस दौरान फूल मंडी तेजपाल रेड़ा आदि व्यापारियों ने महलवाड़ा पर उनका सम्मान किया।

अमरनाथ यात्रा: महत्वपूर्ण तथ्य
अमरनाथ गुफा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है, जो समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर है। यह यात्रा हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यात्रा के दो मुख्य मार्ग हैं। पहलगाम और बालटाल। यह यात्रा लगभग दो महीने तक चलती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

प्राकृतिक रूप से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन
रतलाम के इन यात्रियों ने यात्रा के लिए महीनों पहले से पंजीकरण करवा रखा था। श्रद्धालु कई दिनों से इस पवित्र यात्रा की तैयारी कर रहे थे। रवाना होने से पूर्व उन्होंने अपने घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की। रेलवे स्टेशन पर भी भक्तों को विदा करने बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग पहुंचे। उन्होंने यात्रियों को शुभकामनाएं दीं और सुरक्षित यात्रा की कामना की। अमरनाथ यात्रा को धार्मिक आस्था का एक महत्त्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है, जहां दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए भक्त प्राकृतिक रूप से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन करते हैं। रतलाम से जाने वाले ये जत्थे अलग-अलग चरणों में अपनी यात्रा पूरी करेंगे, जिसमें कई दिनों का समय लगेगा।

बस से करेंगे 48 यात्री अमरनाथ तक यात्रा
अलग-अलग दलों मे ं शामिल श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शनार्थ रतलाम से रवाना हुए हैं। जिनका शहरवासियों ने मंदिरों और रेलवे स्टेशन पर पुष्पवर्षा कर सम्मान कर यात्रा सफलता की प्रार्थना की। यात्री 3 जुलाई से जाने वाले पहले जत्थे में शामिल होंगे। अलकापुरी शनि मंदिर से बस द्वारा बाबा अमरनाथ की यात्रा पर 48 श्रद्धालुओं का दल 15 दिन की यात्रा पर रवाना हुआ।

जम्मूतवी ट्रेन से रवाना हुआ जत्था
रतलाम से पहला जत्थे में बाबा अमरनाथ के दर्शनार्थ पीएंडटी कॉलोनी, चांदनीचौक, दीनदयाल नगर से 15 सदस्यीय दल में नवीन कसेरा, चंदन बसेर, मुकुल, लक्की, लोकेंद्र, राहुल, साहिल, अक्षय, अनिल, जयराज, रितेश, तेजराज वेना आदि शामिल हैं, जो शाम को जम्मू तवी एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना हुए।

त्रिशूल लेकर निकले पंवार
बाबा अमरनाथ की यात्रा पर बलवीरसिंह पंवार 12 किलो का त्रिशूल लेकर रत्नेश्वर महादेव मंदिर से नितीन खत्री, जितू लालवानी, दिलीप के साथ मंगलवार शाम रवाना हुए। इस दौरान फूल मंडी तेजपाल रेड़ा आदि व्यापारियों ने महलवाड़ा पर उनका सम्मान किया।