
ayodhya ram mandir latest hindi news
रतलाम। अयोध्या में राममंदिर तोडऩे में अहम योगदान देने वाले बाबर के वंशज व दिल्ली के शासक बहादुरशाह जफर के वंशज होने का दावा करने वाले प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी ने भगवान श्रीराम मंदिर के तोडे़ जाने पर हिंदू समाज से माफी मांगी है। ये माफी उन्होंने लिखित में मांगी है। इतना ही नहीं, प्रिंस ने कहा है कि अयोध्या में राममंदिर बनाने में उनको कोई आपत्ति नहीं है व पहली नींव का पत्थर वे ही रखेंगे। बता दे कि इनका मध्यप्रदेश से गहरा संबंध है। ये वर्ष में एक बार मालवा के प्रसिद्ध जिले रतलाम के जावरा में होने वाले चेहल्लूम में वर्षो से आते रहते है।
बता दे कि पत्रिका ने फोन पर इस मामले में प्रिंस से बात की। प्रिंस ने कहा कि उन्होंने तो कुछ समय पूर्व रामजन्मभूमि व बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक जताते हुए खुद को विवादीत जगह का मुतवल्ली बनाने की बात कही थी। प्रिंस स्वयं को मुगलवंश का बताते हुए कहते है कि किसी धर्मस्थान को तोडक़र स्वयं के लिए बनाना अल्लाह को मंजूर ही नहीं है। सिर्फ सियासत के लिए इसको उलझाया जा रहा है। देश का असल मुसलमाल मंदिर बनाने के समर्थन में है।
बाबर ने की थी ये वसीयत
इस मामले में प्रिंस याकूब ने राममंदिर तोडऩे वाले बाबर की एक वसीयत का हवाला भी देते है। प्रिंस के अनुसार बाबर ने राजा हुमायुं को कहा था कि अयोध्या में सेनापति मीर बांकी ने मंदिर तोडक़र गलत कार्य किया है। इससे मुगल वंश पर हमेशा के लिए दाग लग गया है। वसीयत में लिखा हुआ है कि यहां अगर हुकूमत करना है तो संत, साधु, हिंदू, मंदिर इनका एहतराम करों, हिफाजत करो। प्रिंस याकूब के अनुसार ये सही है कि हमारे पुर्वजों ने गलत काम किया। लेकिन उसके लिए हम माफी हिंदूओं से मांगते है। ये सिर्फ एक गलती है, जिस पर माफी मिलना चाहिए, न की राजनीति हो।
पत्र जारी किया इसके लिए
इसके लिए प्रिंस याकूब ने हिंदू महासभा को मंदिर तोडे़ जाने की घटना पर माफी मांगते हुए पत्र जारी किया है। इस पत्र में 1528 से लेकर 1530 के बीच अयोध्या में भगवान श्री राम का मंदिर तोडे़ जाने की घटना का उल्लेख करते हुए हिंदू समाज से माफी प्रिंस ने मांगी है। इसके अलावा ये भी लिखा है कि मंदिर बनाया जाए व इसकी नींव में सबसे पहले कार्य उनकी तरफ से किया जाएगा।
Published on:
19 Sept 2018 10:40 am
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