
चातुर्मास में मांगलिक सुनने वाले हमेशा ध्यान रखे यह बात
रतलाम। मांगलिक सुनते है, हम मांगलिक क्यों सुनते है। हमें मांगलिक इसलिए सुनना चाहिए की पाप की इस दुनिया में हमें धर्म याद रहे, दुकान पर हम चोरी बेईमानी करे मिलावट करे। उस वक्त हमें मांगलिक याद आये और हम इन पापों से बचने का प्रयास करे। सुल्लभ बोधि बनने के लिए मांगलिक सुनी जाती है सुल्लभ बोधि मतलब सही जानकारी प्राप्त करने के लिए मांगलिक सुनी जाती है शारीरिक और मानसिक शांति के लिए मांगलिक सुनी जाती है। यह बात चातुर्मासिक धर्मसभा के दौरान नीमचौक में सोम्यदर्शनश्री महाराज ने कही। महाराजश्री ने फऱमाया की हम जैन संत सतियों के दर्शन करते है तो वो हमें कहते है दया पालो, मतलब मन में हमेशा दया का भाव रखो।
बगैर अंदर की गंदगी साफ किए नहीं मिलती शांति
गुरुदेव प्रियदर्शन महाराज ने फरमाया कि आयुर्वेद में किसी भी बीमारी का इलाज करने के पूर्व पेट जुलाब आदि के द्वारा मरीज का पेट साफ किया जाता है। पेट के अन्दर की गंदगी, मल, विकार निकलने के बाद ही आयुर्वेद की दवाई असर करती है। ठीक उसी प्रकार कितनी भी तप, आराधना कर ले प्रवचन सुन ले फिर भी मन को शांति नहीं मिलती है, क्योंकि हमारे मन के पात्र में संसार के मेल की गंदगी भरी हुई है। हम जितना जितना पाप को कम करते जऐंंगे उतना उतना हमारा धर्म बढ़ता जाएगा।
सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप
जैन सोश्यल ग्रुप रतलाम रत्नपुरी द्वारा चार्तुमास प्रारंभ होने के अन्तर्गत मेंं चार्तुमास स्वागत कार्यक्रम में नवकार महामंत्र जाप का आयोजन किया गया। जिसमें रतलाम के सभी जैन सोश्यल ग्रुपों के सदस्यों ने सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप किया। कार्यक्रम में राजेश बोरदिया, संजय लुनिया, अजय मेहता, मनीष पिरोदिया, आलोक छाजेड़, विपुल पितलिया, राकेश कोठारी, हितेष पारख, मनीष मंडलेचा, दीपक जैन, विकास जैन, संजय संघवी, जीवन गांधी, संजय चौपड़ा, जयंत जैन, दीपक डोसी, राजेंद्र दरड़ा, कमलेश बुपक्या, अर्पण गंगवाल, सौरभ छाजेड़, सचिन छाजेड़ आदि सदस्यगण उपस्थित थे।
Published on:
21 Jul 2019 01:28 pm
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