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पांडवकालीन पुरावशेष यहां बिखरे पड़े हैं, जंगल के बीच गुफाएं भी है

पांडवकालीन पुरावशेष यहां बिखरे पड़े हैं, जंगल के बीच गुफाएं भी है
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रतलाम

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Akram Khan

Aug 14, 2018

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पांडवकालीन पुरावशेष यहां बिखरे पड़े हैं, जंगल के बीच गुफाएं भी है

रतलाम। (प्रीतमनगर) पांडवकालीन मां कवलका का सातरुंडा पहाड़ी पर स्थित मंदिर तो जगविख्यात हैं, किंतु इसके अलावा भी कई अन्य पुरासम्पदा भी क्षेत्र में बिखरी पड़ी हैं। जि़ला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर फोरलेन पर स्थित सरवड़ ग्राम पंचायत के कुंडाल गांव जो फोरलेन से 4 किलोमीटर अन्दर बसा हैं। वहां आज भी अस्तित्वमान हैं पांडवकालीन ऐतिहासिक कोटेश्वर महादेव मंदिर और प्राचीन गुफाएं।

लोकमान्यता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवपुत्रों ने दिन गुजारे थे। मंदिर से थोड़ा आगे चलकर पहाड़ी के अंदर वर्तमान में 25 फीट गहरी गुफा में गुप्त गुप्तेश्वर महादेव विराजित हैं। ग्रामीण गोपाल डामर बताते हैं कि गुफा से होकर उज्जैन महाकाल का एक गुप्त मार्ग था, जिसे कालांतर में बंद कर दिया गया। कोटेश्वर में भगवान शंकर सपत्निक माता पार्वती के साथ विराजित हैं, जहां साधु धुनी रमाते हैं। प्रतिवर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा को यहां मेला लगता है तथा श्रावन माह में प्रतिवर्ष डामर परिवार कुंडाल द्वारा सात दिवसीय भागवत कथा आयोजित की जाती है।

पहाड़ का जल करता महादेव का अभिषेक
रत्तागिरी नदी के तट पर स्थित प्राचीन मंदिर पर प्रकृति ने अनुपम छटा बिखेर रखी हैं। विशाल बरगद का वृक्ष इसका साक्षी है, नीचे कल-कल बहती बरसाती रत्तागिरी नदी जिस पर बना कोटेश्वर बांध और पेड़ों पर कलरव करते पक्षी श्रद्धालुओं का मन मोह लेते हैं। पहाड़ से गिरती जल की बूंदें महादेव का स्वयंमेव जलाभिषेक करती हैं । यहां से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भीमचुल जहां कुन्ती पुत्र भीम अपने भ्राताओं सहित रसोई बनाते थे। अदर पान के नाम से विख्यात एक पत्थर जो अपनी धुरी पर कई गुना भारी टनों वजऩी चट्टान को रोके हुए खड़ा है।

वर्षभर रहता जलकुंभी में पानी
मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ पर शिवलिंग का उभार आगन्तुकों को आश्चर्यचकित करता है। कोटेश्वर महादेव मंदिर से 1 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते में Óखांसी माताÓ का स्थान है, जहां चट्टान में एकत्रित रिसता पानी पीने से पुरानी से पुरानी खांसी समाप्त हो जाती है। चट्टान में बनी जलकुंभी में वर्ष भर पानी रहता है, जेष्ठ मास की भीषण गर्मी में भी टेकरी पर स्थित उक्त खांसी माता के स्थान पर थोड़ी मात्रा में जल संग्रह रहता है। इसी स्थान पर सातरुडा माताजी से दक्षिण दिशा में एक ÓभीमकुंडÓ भी अस्तित्व में है, किवंदती है कि इस कुंड से गदाधारी भीम ने पानी पिया था।